जीरे के उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोत्तरी के भय से भारी गिरावट

जीरे के उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोत्तरी के भय से भारी गिरावट
कमल शर्मा 
ऊंझा। अनुकूल मौसम एवं अच्छी बारिश से इस साल देश में जीरे का रिकार्ड उत्पादन होने की संभावना से इसकी कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है। हालांकि, जीरे का निर्यात सुस्त रहने एवं घरेलू मांग आक्रामक न होने से भी पिछले छह महीनों से इस कमोडिटी के दामों पर दबाव बना हुआ है। जीरे के रिकार्ड उत्पादन की जो संभावना है, उसे देखते हुए इस समय आयातक से लेकर दिसावरी कारोबारी इसकी खरीद से दूर हो चुका है जो आने वाले दिनों में इसके भाव और नीचे लेकर जा सकती है। देश के मुख्य जीरा उत्पादक राज्यों गुजरात एवं राजस्थान में इस साल जीरे की उत्पादकता (यील्ड) पिछले साल से 25-30% अधिक रहने की संभावना है। कारोबारी अनुमान के मुताबिक चालू रबी सीजन में जीरे का उत्पादन 88-90 लाख बोरी (प्रति बोरी 55 किलोग्राम) रह सकता है। 
गुजरात कृषि विभाग के मुताबिक राज्य में 20 जनवरी तक जीरे की बोआई 487821 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल समान समय में यह बोआई 347539 हेक्टेयर में हुई थी। राज्य में जीरे का सामान्य रकबा 3.36 लाख हेक्टेयर रहता है। जबकि, राजस्थान में 3 जनवरी को आए अंतिम आंकड़ों के मुताबिक जीरे की बोआई 640500 हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले रबी सीजन में यह बोआई 676240 हेक्टेयर में हुई थी। किसानों का कहना है कि इस साल अच्छी बारिश एवं सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से जीरे की उत्पादकता (यील्ड) पिछले साल की तुलना में बेहतर आने की उम्मीद है। हालांकि, 26 जनवरी से 15 फरवरी तक का मौसम इसकी उपज में अहम् भूमिका निभाएगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टाक होल्डेर्स के मुताबिक देश में वर्ष 2019 में जीरे का उत्पादन 7574527 बोरी रहा। यह उत्पादन रबी सीजन 2018 में 6917545 बोरी (प्रति बोरी 55 किलोग्राम) था। 
जीरे की फसल शानदार होने के अनुमान से वायदा बाजार में जीरे के दाम घट रहे हैं। कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स में नई फसल का अप्रैल वायदा 14480 रुपए प्रति क्विंटल आ गया है। इस वायदा के आने वाले दिनों में 14380-14150 रुपए तक जाने से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि यह 15150 के अपने अहम सपोर्ट लेवल के ऊपर जाता है तो ही इसमें बढ़त की संभावना है अन्यथा जीरा वायदा के सुधरने की कोई संभावना दिखाई नहीं देती। जीरे की बेहतर फसल की संभावना, मिडल ईस्ट में तनाव, अमेरिका-चीन रिश्तों ने इस साल जीरे की कीमतों को काफी प्रभावित किया है। जीरे के दाम जुलाई 2019 से लगातार नीचे जा रहे हैं। जुलाई 2019 में इसने 18195 रुपए का ऊपरी भाव बनाया था एवं बीते छह महीनों में यह कभी भी इस लेवल से ऊपर नहीं उठ सका। कारोबारियों का कहना है कि यह पहला साल है जब नई फसल के फारवर्ड सौदे नहीं हो रहे हैं। भारतीय जीरे के आयातक देशों को पता है इस साल भारत में जीरे की बोआई जबरदस्त हुई है एवं नई उपज पर भाव बुरी तरह दब सकते हैं। ऐसे में आयातक देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं। कारोबारी अनुमान के मुताबिक हाजिर में जीरा यदि इस साल 12000-13000 रुपए प्रति क्विंटल बिक जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए क्योंकि 88-90 लाख बोरी की उपज के साथ दस लाख बोरी पुराना स्टाक भी होगा जो कुल उपलब्धता को एक करोड़ बोरी के करीब पहुंचा देगा और यह कीमतों पर दबाव का मुख्य कारक बन गया है।

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