कोरोनावायरस : देश-विदेश की सिंथेटिक फैब्रिक्स की ग्राहकी सूरत की ओर डायवर्ट

गणपत भंसाली'
सूरत। लगभग 1 करोड़ 10 लाख की आबादी के साथ दुनिया के 42वें व चाइना के सातवें बड़े शहर वुहान से प्रारंभ होकर विश्व के 22 देशों तक फैले कोरोना वायरस की व्यापकता तथा इसके खतरे को इतना नहीं आंका था जितना ये फैल चुका है। कोरोना वायरस के गिरफ्त में आए सैकड़ों लोग मौत की आगोश में समा रहे हैं व चाइना के विभिन्न उत्पादों पर निर्भर दुनिया की अधिकांश आबादी के समक्ष वस्तुओं का अकाल सा पड़ता नजर आ रहा है। चाइना निर्मित वस्तुओं व रा-मटीरियल्स की कमी विश्व के अन्य देशों की भांति भारत के विभिन्न शहरों के साथ-साथ देश के विशालतम टेक्सटाइल्स हब के रूप में ख्यातनाम शहर सूरत को भी सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में जब शहर के टेक्सटाइल्स उद्योग व इस इंडस्ट्रीज से जुड़े पोलिएस्टर व नायलॉन यार्न, टेक्सटाइल्स मशीनरी उद्योग, कलर-केमिकल उद्योग, वैल्यूएडिशन उद्योग से जुड़े प्रमुख उद्यमियों से जानकारी चाही तो विदित हुआ कि सूरत में कुछ वस्तुओं का अकाल सा पड़ जायेगा तो यहां की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्रीज के अनेकों उत्पादों की देश विदेश में मांग भी बढ़ जाएगी। आइए किस उद्यमी ने क्या कहा, जाने हम विस्तार से।'
वैल्यूएडिशन आधारित सामग्री का अभाव हो जाएगा'
- संजय सरावगी (लक्ष्मीपति ग्रुप)'
कोरोना वायरस से सूरत के टेक्सटाइल्स उद्योग में अभाव व प्रभाव दोनों पक्ष देखे जा रहे हैं। सूरत में साड़ियों व सलवार सूट आदि पर वैल्यूएडिशन सामग्री का बड़ी मात्रा में उपयोग होता है। जिसमें इमिटेशन जरी, डायमंड, मोती, एम्ब्रॉयडरी धागा, रेडीमेड गार्म़ेंट के उपयोगी बटन आदि सामग्री चाइना से आयात होती हैं। भारत में इसका विकल्प नहीं के बराबर है। अगर है भी तो उसके निर्माण में उपयोगी रा-मटीरियल भी चीन से ही आयात होता है। चीन से आपूर्ति थम जाने से इसका अभाव अभी से नजर आने लग गया है। इन तमाम वस्तुओं का स्टॉक उद्यमियों के पास संभवत: फरवरी अंत तक का भी बमुश्किल होगा। ऐसे में इस सामग्री में भाववृद्धि के संकेत स्पष्ट नजर आ रहे हैं।' दूसरी और चीन से भारत में जो फैब्रिक्स डंप होते थे कोरोना वायरस के चलते अब डेढ़-दो माह तक चीन से ये फैब्रिक्स चालान हो नहीं पाएंगे। ऐसे में सूरत उत्पादित सिंथेटिक फैब्रिक्स की घरेलू स्तर पर व निर्यात क्षेत्र में मांग बढ़ जाएगी।'
कोरोना वायरस का असर, शॉर्ट सप्लाई व कीमतों में इजाफा'
- प्रमोद चौधरी (प्रतिभा ग्रुप)'
कोरोना वायरस की बदौलत चाइना से पूरे विश्व में फैब्रिक्स, नायलॉन व पोलिएस्टर यार्न, टेक्सटाइल्स मशीनरी, कलर-केमिकल की आपूर्ति को ब्रेक लग गया है। परिणामस्वरूप देश-विदेश में सूरत के फैब्रिक्स व यार्न आदि की मांग में इजाफा देखा जा रहा है व सामने शॉर्ट सप्लाई की स्थिति रहने से भाववृद्धि भी होने लग गई है। सिल्क सिटी सूरत से डोमेस्टिक व एक्सपोर्ट हेतु फैब्रिक्स व यार्न में बेतहाशा मांग के आसार दिखाई दे रहे हैं।'
भारत का निर्यात बढ़ेगा-'
गिरधर गोपाल मूंदड़ा: चेयरमेन-ग्लोबल फैब्रिक्स रिसोर्सेज एन्ड रिचर्स सेंटर'
आगामी 2-3 माह भारत के टेक्सटाइल्स उत्पादकों लिए फूल सीजन जैसे रहेंगे। कोरोना वायरस के कारण वहां से किसी भी देश को अन्य उत्पादों के' साथ-साथ टेक्सटाइल्स फैब्रिक्स, यार्न व रा-मटीरियल्स चालान नहीं हो पाएगा। इन हालातों में सम्पूर्ण विश्व के भारतीय टेक्सटाइल्स फैब्रिक्स व यार्न आदि उत्पादों की मांग में इजाफा होगा। सूरत में वेलवेट, स्पेंडेक्स लाइक्रा आदि फैब्रिक्स की गजब की पूछपरख है, तकरीबन ढाई करोड़ मीटर कपड़े के अन्य देशों के ऑर्डर आ चुके हैं। चाइना से आपूर्ति नहीं होने से नायलॉन यार्न में भाववृद्धि भी होनी निश्चित है। (क्रमश:)

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