डय़ूटी रिफंड मिलने में विलंब से एपरल निर्यातक भारी आर्थिक संकट

मुंबई। एपरल और मेडअप्स निर्यातक वित्तीय प्रवाहिता की भारी तंगी का सामना कर रहे हैं। स्टेट लेविस की रिबेट स्कीम और निर्यात इंसेंटिव प्रोग्राम में उनकी भारी रकम फंस गई है।
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन (फिओ) के प्रमुख शरदकुमार सराफ ने कहा कि 6000 करोड़ रु. के डय़ूटी रिफंड का दावा अभी चुकाया नहीं गया है।
आरएससीटीएल स्कीम का 2019 के पूरे वर्ष में अमल ही नहीं हुआ और एमईआईएस स्कीम गत वर्ष के अगस्त से बंद कर दी गई है। एपरल और मेडअप्स क्षेत्र के लिए ऐसा किया गया है। इससे एपरल और मेडअप्स उद्योग को भारी झटका लगा है।
अधिकांश एपरल निर्यातक एमएसएमई क्षेत्र के हैं। इसमें से कुछ लोग कारोबार बंद करने की तैयारी में हैं और कुछ के डिफाल्ट होने की संभावना है। केद्रीय टेक्सटाइल मंत्रालय के 14 जनवरी के गजट नोटिफिकेशन में 7 मार्च 2019 से 31 दिसम्बर 2019 के दौरान एमआईएस और आरओएससीटीएल बीच के फर्क को आफसेट करने के लिए 1 प्रतिशत वन टाइम एडिशनल एडहाक इंसेंटिव की घोषणा की गई है। सरकार ने पहले जो घोषणा की थी, उससे विरोधाभाषी यह बात है। आज तीव्र स्पर्धा में खड़े रहने का सामर्थ्य निर्यातकों में नहीं है। इनमें से बहुतों ने आरओएससीएल और एमईआईएस लाभों पर स्टेच्युटरी टैक्स अदा कर दिया है।
फिओ के प्रमुख ने कहा कि कमिटमेंट की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण है।

© 2020 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer