नकली, मिलावट का धंधा भी भयंकर बीमारी और महंगाई का स्त्रोत है

हमारे संवाददाता'''''
इंदौर। इंदौर शहर में केंसर जैसी बीमारी पर अस्पताल दस वर्ष पूर्व तक नहीं थे। अस्पतालों से ले गई जानकारी के अनुसार आज ये अस्पताल केंसर के मरीजों से भरे पड़े है। जितना विकास देश में हो रहा है ईमानदारी उतनी ही घटती जा रही है। व्यापार जगत अनैतिकता का क्षेत्र होता जा रहा है। पिछले दिनों इंदौर और आसपास के इलाको में नकली मसाले का कारखाना और नकली शुद्ध घी का निर्माण होत हुए छापेमारी में पकड़ाया। कई किलो पेक मसाला जो कि इलायची के छिलको और लकडी के बुरे, छिलने से तथा कुछ केमिकल क थउपयोग से बनाए जा रहे थे पकड़ाये। इसी तरह नकली शुद्ध घी का उत्पादन होते हुए कई टीन नकली शुद्ध घी का पकड़ाया। जाकि पाम-सोया तेल तथा वनस्पति घी में ऐसेंस के मिश्रण द्वारा बनाया जा रहा था। ऐसा नहीं है कि ये नकली और मिलावटी उद्योग का पहला कोई मामला है । डे केयर के' सिनियर सीटीजनों का इस विषय में कहना है कि' पिछले दस वर्षो में कोई सैकड़ों पकड़ाये है जिन पर कोई कड़ाई की कार्यवाही नहीं हुई। हुई होती तो बीमारियां नहीं पलती। उनका कहना है कि नकली के उत्पादन और केमिकल से पके फ्रुट से तो बाजार पटा पड़ा है। खाद्यपदार्थ़ों के रखरखाव और केमिकल से पके तथा खेतो में बढ रहा अति पेस्टिसाईड चलन भी केंसर जैसी बढती बीमारियों का कारण है। डाक्टरर्स की' माने तो हर पचासवां व्यक्ति अर्थराईटिस की सिवियर बीमारी से ग्रसित है। पत्तियें की सब्जियों में डीडीटी जैसे पेस्टिसाईड की बदबू को तो सीधे तौर पर ही सूंघा जा सकता है। कीड़ों से बचाने में सब्जियों का रखरखाव लंबी अवधि पर सट्टा कर बाजार में लाना यह महंगाई बढ़ाने का कारण भी रहा है। देशभर में एक चलन महंगाई का कारण देखने और समझाने में आया है कि नकली उत्पादों की आड़ में असली वाले भाव बढ़ा देते है। पूछने पर बताते है कि बाजार में डुप्लिकेट भी उपलब्ध है। जिसकी गुणवत्ता और चलन में लंबी अवधि का विश्वास का डर दिखाकर वह बेच रहा है। खरीदशक्ति नहीं होने पर खरीददार नकली माल खरीदकर अपना काम चलाता है। अर्थात नकली और असली के मार्केट में' जब नकली का भाव दस प्रतिशत थोड़ा बढ़ता है तो असली वाला बीस प्रतिशत के वेग बढ़ जाता है।

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