बासमती धान के वायदा कारोबारियों के लिए सौदा करने का सुनहरा मौका

आवक जोरदार और मांग कम होने से बासमती धान की कीमतों में गिरावट जारी है जो खास तौर पर मध्यम और मध्यम-दीर्घ अवधि के निवेशकों को काफी लुभा रही हैं। हालांकि कारोबारियों को कहना है कि इस साल बासमती धान के निर्यात में कोई सुधार होने के आसार नज़र नहीं आते, जिससे आने वाले दिनों में इसकी कीमतें और गिरने की संभावना है। 
इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) में गत कुछ हफ्तों से लाल निशान में चल रही बासमती की कीमतों ने इस सप्ताह भी गिरावट के रुख से शुरुआत की। सोमवार को पिछली क्लोजिंग से नीचे 3,234 रुपए पर बंद हुआ बासमती का मार्च वायदा मंगलवार को और गिरा। आईसीईएक्स में बासमती धान के सबसे सक्रिय मार्च वायदे का कॉन्ट्रैक्ट मंगलवार को 0.7% नीचे 3,216 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। देश के प्रमुख स्पॉट मार्केट में भी पूसा 1121 बासमती धान की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली के कारोबारियों ने बताया कि बासमती धान की आवक जोरदार है लेकिन निर्यात मांग बहुत नीचे है, जिससे कीमतें लगातार गिर रही हैं। साथ ही, इस साल निर्यातकों की ओर से सकल मांग में कोई इजाफा या बड़ा सुधार होने की कोई गुंजाइश नहीं है, जिससे आने वाले दिनों में बासमती की कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है। 
एक बात साफ है कि अमेरिका-ईरान के बीच हालिया विवाद और तनावों की बहुत गहरी मार भारत के बासमती कारोबारियों, किसानों और निर्यातकों पर पड़ी है। इसके बावजूद सरकार की ओर से फिलहाल कोई पहल होती दिख नहीं रही। ऐसे में बासमती के धंधे से जुड़े लोगों को खुद ही अपने लिए एक सही रास्ता निकालना होगा। फिलहाल यह रास्ता अपने माल को आईसीईएक्स जैसे देश के भरोसेमंद वायदा 
एक्सचेंजों में हेज़ करने के साथ ही इसमें उचित ढंग से निवेश करके ही निकल सकता है और इस तरह से मौजूदा स्थिति का फायदा वायदा कारोबारियों के साथ-साथ किसान और बासमती के अन्य कारोबारी व एजेंट भी उठा सकते हैं। 
बताते चलें कि इस साल ईरान के लिए शिपमेंट में भारी गिरावट के कारण ईरान सहित कई खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में भारत से बासमती का निर्यात लगभग ठप्प पड़ गया है। वर्ष 2018-19 (अप्रैल से मार्च) में भारत से कुल बासमती निर्यात का 30% हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों में गया था। कृषि प्रसंस्कृत और खाद्य उत्पाद विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, बीते साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच बासमती निर्यात में 10% से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। इन सात महीनों में भारत से मात्र 2.06 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात हो पाया। अमृतसर के एक कारोबारी ने माना कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आनेवाले दिनों में ईरान को भारत से होने वाले बासमती के निर्यात में और गिरावट देखी जा सकती है। दोनों देशों के बीच कोई राजनीतिक पेंच फंसा है जिसे सरकार ही दूर कर सकती है तथा बासमती के किसानों, कारोबारियों व निर्यातकों को बेमौत मरने से बचा सकती है।

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