भाजपा में मंथन, कांग्रेस में खंडन

दिल्ली विधानसभा के चुनाव परिणाम के बाद भाजपा में मनोमंथन और आत्म परीक्षण की तैयारी चल रही है तब कांग्रेस में पराजय के लिए शीला दीक्षित- जिन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में 15 वर्ष तक दिल्ली में विकास और कांग्रेस के उद्धार के लिए काम किया- उन पर दोष की टोकरी डालने की शुरुआत हुई है- दिल्ली में यादवास्थली सार्वजनिक में होती है!
प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और भारत सरकार प्रेसिडेंट ट्रम्प के स्वागत की तैयारी में व्यस्त हैं। नरेद्र मोदी ने अमेरिका में फिर एक बार ट्रम्प सरकार का नारा गुंजायमान किया था। अब ट्रम्प गुजरात-भारत से अमेरिका में बसे गुजरातियों-भारतीयों को संदेश देंगे।
दिल्ली में पराजय का शोक करने के स्थान पर कांग्रेस को खुशी भाजपा के पराजय की है, लेकिन भाजपा के नेतृत्व को अब चुनाव में राष्ट्रवाद और क्षेत्रवाद को अलग रखना पड़ेगा। बालाकोट और हाफिज सईद की सजा-में भारत की सफलता है। ट्रम्प के भारत दौरे से पहले हाफिज को सजा घोषित हुई, वह द्योतक है और अब पाकिस्तानी आतंकवाद नियंत्रण में आएगा- अथवा उसका अंजाम आएगा, ऐसी आशा रखें। प्रादेशिक चुनाव में प्रदेशवाद-विकास-जनता का कल्याण महत्वपूर्ण है। इसमें धर्मवाद और सेक्युलरवाद की व्याख्या बदल जाती है। गुजरात के चुनाव में राहुल गांधी जनेऊधारी ब्राह्मण बने, लेकिन अवसरवाद छिपा नहीं रह सकता। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने सेक्युलरवाद को नहीं छेड़ा, बल्कि छोड़ा। शाहीन बाग गए ही नहीं जिससे समर्थन- विरोध में तटस्थ रहे और अंतिम चरण में हनुमानजी के मंदिर गए- हनुमान चालीसा सुनाया और `मने कभी हिन्दुओं का विरोध नहीं किया', ऐसी घोषणा की, परिणाम आने के बाद कहा- आज मंगलवार है। हनुमानजी का वार है- हमें शक्ति- आशीर्वाद देते हैं!
इसके बावजूद मुस्लिम मतदाताओं ने केजरीवाल को मत दिया, कांग्रेस को नहीं। किसलिए नहीं? उस पर विचार कांग्रेस को करना चाहिए। केजरीवाल का धर्मवाद-हिन्दुत्व सभी को स्वीकृत है। हिन्दू राष्ट्र का कोहराम मचाने वाले कांग्रेसी और वामपंथियों को अब दिल्ली में `हिन्दू-राज्य' दिखायी देगा? सेक्युलरवाद की नई-सच्ची व्याख्या हुई है कि हिन्दु-विरोधी नहीं। भाजपा को भी अब इसका अर्थ समझाना पड़ेगा। मोदी तो कहते ही हैं- मुस्लिम विरोधी नीति नहीं। सबका विकास-विश्वास। इसे हिन्दू और मुस्लिम समाज को भी समझने की जरूरत है।
भाजपा के युवा नेताओं को चुनाव प्रचार में आक्रामक नहीं जोड़नेवाली भाषा का उपयोग करना चाहिए। चुनाव-लोकतंत्र का अंग है- जंग नहीं। आगे के सभी चुनावों में दिल्ली का चुनाव `मॉडल' बना रहेगा।

© 2020 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer