काटन यार्न और कपड़े का निर्यात 40 प्रतिशत घटने की संभावना

आरओएससीटीएल स्कीम में काटन यार्न और कपड़े को शामिल करने की टेक्सप्रोसिल की मांग
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई । भारत के काटन यार्न और कपड़े का 41 प्रतिशत निर्यात 10 कोरोनाग्रस्त देशों में होता है। यह निर्यात लगभग ठप हो गया है। यदि स्थिति नहीं सुधरती है तो आगामी महीनों में निर्यात 40 प्रतिशत से अधिक घटेगा, दी काटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउन्सिल (टेक्सप्रोसिल) के चेयरमैन डॉ. केB. वी. श्रीनिवासन ने उक्त बात कही।
कोरोना वायरस से आयात - निर्यात सहित की आर्थिक प्रवृत्तियों पर पड़ने वाले गंभीर असर के बारे में उन्होंने चिंता व्यक्त की।
कोरोना वायरस यूनाइटेड स्टेट्स के अलावा अग्रणी बाजार यूरोप के देश जैसे स्पेन, पुर्तगाल, इटली के अलावा यूनाइटेड किंग्डम में भारी कहर बरपा रहा है। इससे निर्यात आर्डरों में बड़े पैमाने पर कैन्सलेशन या डिफरमेंट आ रही है। भारत से होम टेक्सटाइल्स आयात करने वाले खरीददारों और मुख्य रिटेल शॉप्स ने और कारोबार करने पर ब्रेक लगा दिया है। इससे 15-20 दिन में स्थिति न सुधरने पर यहां उत्पादन में भारी कटौती करने और लेआफ्फ देने का भय सबको सता रहा है।
इससे बीमार टेक्सटाइल उद्योग को तत्काल नीति विषयक मध्यस्थी की और वित्तीय समर्थन की जरूरत है। इससे केद्र सरकार को निम्नलिखित कदम तत्काल उठाने चाहिए।
(1) आरओएससीटीएल स्कीम में काटन यार्न और कपड़े को शामिल करना चाहिए ताकि घटते बाजार के समय में भारत की स्पर्धा में टिके रहने का सामर्थ्य बढ़ सके।
(2) 3 प्रतिशत के ब्याज सबवेंशन को 31 मार्च, 2020 के बाद आगे बढ़ाना चाहिए और उसमें काटन यार्न को शामिल करना चाहिए।
(3) 9404 के तहत शामिल आइटमों जैसे क्विल्टस, फैशन बेडिंग और 420222 के तहत शामिल किए गए काटन शॉपिंग बैग्स को आरओएससीटीएल स्कीम में शामिल करना चाहिए। इन आइटमों के मेडअप्स एचएस चेप्टर 63 के तहत न आने से इस समय उनको अलग रखा गया है।
(4) सभी टेक्सटाइल प्रोडक्टस के लिए एमईआईएस स्कीम को 31 मार्च, 2020 के बाद चालू रखना चाहिए।
(5) जीएसटी रिफंड जल्दी मिलना चाहिए। आरओएससीटीएल भुगतान की उलझन का समाधान करना चाहिए। पूर्व के आरओएसएल स्कीम तहत के दावों की रकम जारी करनी चाहिए।
टेक्सप्रोसील के चेयरमैन डॉ. के. वी. श्रीनिवासन ने कहा कि इन आइटमों की यूएसए में अच्छी मांग है। चीन से आती आपूर्ति प्रभावित होने से भारत को निर्यात बढ़ाने का उत्तम अवसर है। इससे सरकार को उपरोक्त मांग पर जल्दी अमल करना चाहिए जिससे निर्यात की विकास दर बरकरार रह सके।

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