कंपनियों की छोटी गलतियां नहीं मानी जाएंगी अपराध

लोकसभा में पेश हुआ कंपनी (संशोधन) विधेयक 2020
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । कंपनी कानूनों में बदलाव की दिशा में अहम कदम बढाते हुए केद्र सरकार ने 17 मार्च 2020 को लोकसभा में कंपनी (संशोधन) विधेयक 2020 पेश किया।इसमें कंपनियों की छोटी-मोटी गलतियों को अपराध के दायरे से बाहर करना, सीएसआर नियमों में नरमी और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनक्लैट) की पीठों की स्थापना जैसे प्रावधान है।
दरअसल संशोधन विधेयक के माध्यम से कंपनी कानून 2013 के कई प्रावधानों को बदला जाएगा।जिसके तहत विधेयक के उद्देश्य एवं कारण को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि किसी कंपनी की ऐसी गलती जिसमें कोई धोखाधड़ी या जनहित पर व्यापक प्रभाव नहीं होगा जिसे अपराध के दायरे से बाहर रखा जाएगा।भारतीय कंपनियों को सीधे विदेश में सूचीबद्व की अनुमति देने के साथ साथ यह विधेयक केद्र सरकार को अधिकार देगा कि वह कुछ निश्चित श्रेणी की कंपनियों को सूचीबद्व कंपनी की परिभाषा से छूट दे सकेगी।यद्यपि यह कदम बाजहार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) से विचार विम।ा… के बाद उठाया जाएगा।जिसके तहत 50 लाख तकम की सीएसआर बाध्यता वाली कंपनियों को इस संदर्भ में कमेटी बनाने की जरुरत नहीं होगी।इसके अतिरिक्त ऐसी कंपनियां जिन्होंने किसी वित्त वर्ष में सीएसआर मद में अतिरिक्त खर्च किया है वह अगले वित्त वर्ष़ों में उस अतिरिक्त राशि को एडजस्ट कर सकेंगी।जिसके तहत एनक्लैट की अन्य पीठें स्थापित करना और पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाने की स्थिति में नॉन-एक्जीक्यूटिव डायरेक्टरों को पर्याप्त वेतन देने की अनुमति देने का भी इसमें प्रस्ताव है।ऐसे में छोटी या एक व्यक्ति वाली कंपनियों पर कम जुर्माने का प्रस्ताव भी संशोधित विधेयक में किया गया है।जिसको लेकर केद्र सरकार कुछ संशोधनों के जरिए कंपनियों के लिए कारोबार जारी रखना आसान बनाएगी।जिसको लेकर केद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 मार्च 2020 को कंपनी कानूनों में 72 बदलावों को मंजूरी दी थी।जिसको लेकर केद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि कंपनी कानून से अपराध की धाराएं हटाना केद्र सरकार की प्राथमिकता में है।ऐसे में इन 72 बदलावों के माध्यम से कानून की 65 धाराओं में संशोधन होगा।

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