नरेद्र मोदी का आह्वान : जनता की जिम्मेदारी

कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ जंग में जुड़ने का आह्वान कर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने 130 करोड़ भारतीयों को सावधान और सुसज्ज किया है। विश्व के विकसित और समृद्ध देश भी इस महामारी के सामने लाचार हैं । जबकि भारत महामारी को उभरते ही रोकने में सफल हो- और सफल होगा ही- उसे विश्व के इतिहास में दर्ज किया जाएगा और इस सफलता के लिए लोगों का सहयोग अनिवार्य है। प्रधानमंत्री ने ऐसे सहयोग के लिए संकल्प और संयम पर जोर दिया है। हमारी सीमा पर ``महामारी का प्रवेश बंद'' है- इसके बावजूद यात्रियों के साथ ``घूसपैठिए-विषाणुओ'' को चुन-चुनकर साफ करने के लिए कदम उठाया जा रहा है। इस महामारी की दवा-उपचार सुलभ नहीं है, तब `अटकाव' एक ही विकल्प है। चीन में हजारों का शिकार करने के बाद महामारी नियंत्रण में होने की खबर है। हालांकि इसके लिए सख्त नियंत्रण-लोकडाउन - शहरों की `तालाबंदी' करनी पड़ती है। भारत में ऐसी स्थिति अनिवार्य न बने उसके लिए लोगों के सहयोग का ``निमंत्रण''- आव्हान हुआ है, यह लोकतंत्र है।
प्रधानमंत्री ने फिर से जनता का सहयोग मांगा है- यह उनकी लोकप्रियता की कसौटी नहीं है! यह कसौटी हमारी – लोगों की है- सहयोग में कमी ने रहे उसे देखना है। महानगर मुंबई - लोकडाउन - करने और पूरा भारत बंद करने का सुझाव हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री ने स्वैच्छिक बंद का सुझाव दिया है- ``जनता कर्फ्यू'' का भूला ``विकल्प'' ताजा किया है।
प्रधानमंत्री ने ``सावधान'' के संदेश के अलावा देश को भरोसा दिलाया है कि सभी आवश्यक वस्तुओं की भरपूर आपूर्ति है- कमी पैदा होने का भय रखने की जरूरत नहीं है। अनाज का ढेर है, गोदामों की कमी है। इसके अलावा समाज के कमजोर वर्ग की जरूरतों का ध्यान रखने- वेतन नहीं काटने की अपील की है।
युद्ध के समय ब्लैक आउट और बचाव कार्य का मोकडील - प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी तरह इस समय ऐसा प्रशिक्षण - तैयारी पर विचार करना चाहिए।
इस समय सार्वजनिक स्थलों में भीड़भाड़ न हो उसके लिए निमंत्रण सुझाए गए हैं - मंदिर भी बंद हुए हैं  और लोकल तथा बस व्यवहार में लोगों की संख्या घटी है- उसका अपेक्षित असर होने पर महाराष्ट्र और राष्ट्र बंद की जरूरत नहीं होगी- लेकिन जनता के सहयोग पर आधार रहेगा।
व्यापार-उद्योग के संगठन `मास्क' वितरण के लिए आगे आए हैं  और नागरिक अपना कर्तव्य पूरा कर सामाजिक- अंतर रखकर संपर्क टालते हैं । उद्योगपति भी राष्ट्रधर्म निभाने के लिए तैयार हैं । राष्ट्रीय एकता दिखाने का यह अवसर है।
भारत सरकार ने 13 मार्च से विदेशी यात्रियों के भारत प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया। भारत एक मात्र देश है जिसने विदेश में फंसे भारतीयों के अलावा बांग्लादेशियों को भी भारत लाने के लिए विमान भेजा।
प्रधानमंत्री मोदी ने पड़ोसी देशों- सार्क के सदस्यों के साथ सहयोग और सहायता की शुरुआत की। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री और सउदी अरब के प्रींस के साथ संपर्क किया... भुटान ने कहा- नरेद्र मोदी का नेतृत्व बेमिसाल है...
राजनीतिक पार्टी- विशेषकर कांग्रेस के बहुत से नेताओं ने प्रधानमंत्री के आह्वान- अपील का स्वागत किया है, स्वीकार किया है- चिदंबरम और उनके पुत्र कार्तिक ने भी सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री को सुनामी के लिए तैयार रहने की सलाह देने वाले राहुल गांधी की बात छोड़ो...! तृणमूल कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री सुब्रतो मुखर्जी का कहना है कि हम प्रधानमंत्री को सहयोग कयों दें? यह तो आरएसएस का प्रोग्राम है। ये नेता कदाचित् अपवाद होंगे ऐसा मान लें? महामारी के सामने लड़ाई मोदी की है या भारत की?
आज भारत के ``नमस्ते'' संस्कृति को विश्व के धुरंधर नेताओं ने स्वीकार कर लिया है- कल भारत की जनता का सहयोग राष्ट्रप्रेम और वसुधेव कटुम्बकम की भावना को सलाम करेंगे...

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