कपड़ा-परिधान में पश्चिमी देशों से निर्यात के अच्छे ऑर्डर

कपड़ा-परिधान में पश्चिमी देशों से निर्यात के अच्छे ऑर्डर
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । कोरोना वायरस से आशंकित अमेरिका व यूरोपीय देशों ने कपड़ा-परिधान की चीन से खरीदी करने पर रोक लगा रखी है।ऐसे में अमेरिका एवं यूरोपीय देशों की तरफ से अब कपड़ा-परिधान की खरीदी को लेकर भारतीय बाजार पर ध्यान केद्रित करना शुरु कर दिया है।जिसके तहत डॉलर की तुलना में रुपए की ऐîतिहासिक मंदी यानि 75 रुपए के आसपास है।जिसके चलते अमेरिका एवं यूरोपीय देशों को भारतीय कपड़ा-परिधान की खरीदी करने में अपेक्षाकृत अच्छी पड़तल लगेगी जिसको लेकर ही सही मायने में भारतीय बाजारों में निर्यात के ऑर्डर देना शुरु कर दिया है।ऐसे में भारतीय कपड़ा-परिधान में आगे पश्चिमी देशों की निर्यात मांग बढने की उम्मीद है।जिसको लेकर भारतीय कपड़ा-परिधान के निर्यातक बेदह चौकस है और इस सुनहरा अवसर का फायदा उठाने का पूरजोर कोशिश में सक्रिय हो रखे है।ऐसे में लगता यह है कि भारतीय कपड़ा-परिधान के निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुख बनेगा।
दरअसल कोरोना वायरस के चलते भारतीय बाजार में आवाजाही अपेक्षाकृत बाधित हो रखी है।जिससे भारतीय कपड़ा-परिधान उद्योग-व्यापार 40/50 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है।जिससे भारतीय कपड़ा-परिधान उद्योग-व्यापार के क्षेत्र में अब तक 1200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।बहरहाल कोरोना वायरस के चलते पश्चिमी देशों जैसे कि अमेरिका व यूरोपीय देशों की तरफ से चीन से कपड़ा-परिधान का ऑर्डर देना बंद कर रखा है।ऐसे में अमेरिका और यूरोपीयी देशों की तरफ से अब भारतीय कपड़ा-परिधान के ऑर्डर देना शुरु कर दिया है।वहीं डॉलर की तुलना में रुपए की ऐतिहासिक मंदी के चलते पश्चिमी देशों को भारतीय कपड़ा-परिधान खरीदने में पड़तल अच्छी लग रही है।जिससे भारतीय कपड़ा-परिधान में आगे पश्चिमी देशों की निर्यात मांग बढने की उम्मीद बनी हुई है।ऐसे में कपड़ा-परिधान के निर्यात क्षेत्रों से संबंधित कारोबारियों की तरफ से कहा जा रहा है कि केद्र सरकार को भारतीय कपड़ा-परिधान के निर्यात सुधारने को लेकर अविलम्ब प्रोत्साहन दिया जाए ताकि निर्यात को बढाने का बेहतर मौका मिल सकेगा।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से भारतीय कपड़ा-परिधान के निर्यातकों को भरोसा में लिया जाए ताकि अधिकाधिक निर्यात को सुदृढ बनाने में अग्रसर हो सकेंगे।जिससे ही सही मायने में कपड़ा-परिधान के निर्यात के मोर्चे पर आगे सकारात्मक रुख बन सकेगा।जिससे कि एक तरफ भारतीय कपड़ा-परिधान के उद्योग व्यापार के समक्ष उत्साहजनक माहौल बनेगा।वहीं दूसरी तरफ भारतीय कपड़ा-परिधान के उद्योग व्यापार के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बने रहने के आसार नजर आ रहा है।वैसे तो विगत माह के दौरान कपड़ा-परिधान का निर्यात 20/25 प्रतिशत तक बढी है।जिसके तहत रेडीमेड वस्त्रों का निर्यात जनवरी में 1.45 बिलियन डॉलर रहा था।वहीं रेडीमेड वस्त्रों का निर्यात दिसम्बर में 1.41 अरब डॉलर का रहा था।जिससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि भारतीय रेडीमेड वस्त्रों की मांग में इजाफा हुआ है।जिसको लेकर दिल्ली के चांदनी चौक स्थित हवेली हैदरकुली की थोक कारोबारी प्रतिष्ठान धनलक्ष्मी एक्सपोर्ट के बिजनेस संचालक श्री राजन छाजेड़ ने बताया कि कॉटन ग्रे में दिल्ली के गांधीनगर,शांतिमुहल्ला,टड रोड सहित जोधपुर,अहमदाबाद की डाइúग-प्रिटिंग इकाइयों की पूछपरख शुरु हो रखी है और थोक कारोबार का दायरा बढने की उम्मीद है।उन्होंने आगे बताया कि कोरोना वायरस के चलते पिछले दिनों कॉटन यार्न के निर्यात प्रभावित हुआ है।जिससे घरेलू बाजार में कॉटन ग्रे के भाव पचास पैसे से एक रुपए तक घटा है।जिसका फायदा डाइúग प्रिंटिंग इकाइयों को मिलेगा।उन्होंने दिल्ली में कॉटन ग्रे ईरोड,भिवंडी, इच्छीकरंजी से आता है और निर्यात से संबंधित कॉप परिधान इकाइयों को सप्लाई दी जाती है।ऐसे में आगे कॉटन-परिधान की निर्यात मांग सुधरने के आसार है।जिससे स्वभाविक है कि कॉटन ग्रे के थोक कारोबार में सुधार का मार्ग प्रशस्त होगा।

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