धागे में उठाव कम होने से मिलर्स भाव तोड़कर बिकवाल

धागे में उठाव कम होने से मिलर्स भाव तोड़कर बिकवाल
हमारे संवादाता
सूत बाजारों में धागे का उठाव कम होने के साथ ही मिलों को धागा भाव तोड़कर के बेचने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। कोरोना का साया अब तक सूत मिलों पर ही दिखायी पड़ रहा था अब बाजारों में ग्राहकी कम होने से फुटकर के व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। दिसावर की मंडियों में चादर व अन्य सूती कपड़े की आइटम सप्लाई करने वालों पर भी इसका असर पड़ने लगा है। चादर की सप्लाई करने वाले कारोबारियों का कहना है कि पहले धागे के भाव घटे थे। अब बाजारों में कामकाजों का मंदा होने से कारोबारी भाव घटाकर के माल बेच रहे हैं । अगर बाजारों में इसी प्रकार से ही मंदा रहा तो आगे पखवाड़े में तैयार मालों के भावों में और भाव टूट सकते हैं । कामकाज कम होने से बाजारों में भुगतान का असर भी दिखायी पड़ने लगा है।  
 व्यापारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना संकमण का प्रभाव अब बाजारों में कम ही नहीं हो रहा है। कोराना के कहर से आजकल सभी प्रकार के थोक कारोबार बुरी तरह से धाराशायी हो रहे है। बाजारों में चल रही उठापटक ने कारोबारियों को हिलाकर के रख दिया है। सूत के बाजारों में बराबर ही मंदी का वातावरण बना हुआ है। पिछले एक महीने के बाजारों पर नजर डाले तो सभी प्रकार के धागों में मंदी का वातावरण बना हुआ है। बाजारों में ग्राहकी बुरी तरह से नदारद है।  
किसी प्रकार के थोक बाजारों में जितना मंदा आया है, लेकिन फुटकर के बाजारों में ग्राहकों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। जब तक रिटेलर भाव नहीं घटाएंगे तब तक बाजारों में ग्राहकी निकलने वाली नहीं है। रिटेल भाव घटाकर के माल नहीं बेचने के कारण बाजारों में बिक्री को ब्रेक लग रहा है। फुटकर में ग्राहकी निकलने के बाद ही थोक के बाजारों में कामकाजों में सुधार आ सकता है।  
नगर के चादर में थोक सप्लाई को कारोबार करने वाले चादर कारोबारी अजय टाँक का कहना है कि जब से कोरोना का साया बाजारों पर पड़ा है तब से तैयार चादरों व गर्मी की आइटमों में काम ही नहीं हो रहा है। हमें तो तैयार माल को सूत के घटते भावों के हिसाब से ही बेचना पड़ता है। चादरों व गर्मी में काम आने वाले तैयार कपड़ों की ग्राहकी काफी कम हो गयी है। ग्राहकी कम होने के साथ ही कपड़ा उत्पादकों ने कपड़े का उत्पादन कम करना आरंभ कर दिया है। जब तक बाजारों में कोराना का कहर कम नहीं हो जाता है तब तक बाजारों में कामकाजों की चाल बनने की संभावना कम ही दिखायी पड़ेगा है। इस लिये बाजारों को उबरने में अभी वक्त लग सकता है।

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