कोरोना का प्रभाव खाद्यतेलों में भाव घटकर पुन: बढ़े

कोरोना का प्रभाव खाद्यतेलों में भाव घटकर पुन: बढ़े
हमारे संवाददाता 
इंदौर । संसार भर के शेयर बाजारों का गिरना जारी रहा । मंदी की ओर वैश्विक बाजार का दर्पण बना हुआ है, मगर गत् हप्ते खाद्य तेलो में उल्टी चाल बनने से तेजी रही । गत् हप्ते के पूर्वार्ध में बाजार की चाल में सोया तेल भाव 760-765 रु. तक नीचे आने के बाद बुधवार गुरुवार से भाव में तेजी होकर सोया तेल भाव हाजिर में 775 रु. तक होना बताए जा रहे थे। वही इंदौर पाम तेल का भाव भी उछलकर 770 रु. तक होना बताया जा रहा था । मूंगफली तेल 1300 रु. प्रति 10 किलो का भाव थोक में होना बताया जा रहा था । कपास्या तेल भी 695 से  उछलकर 710 रु. तक होना बताया जा रहा था ।   
वैश्विक मंदी का सबसे बडा कारण कोरोना वायरस है जिससे घट रहा आयात-निर्यात मांग में कमी आना बताया जा रहा है । पाम तेलो के उत्पादक देशों से निर्यात का प्रभावित होना वहां बढ़ रहे स्टॉक और चीन की मांग में भारी कमी आने से वैश्विक वायदा बाजारो में लगातार गिरावट का होना बताया जा रहा है ।  वैश्विक उठा-पठक में भारतीय खाद्यतेल बाजारों में भी एक सीमा में सटोरियात्मक तेजी-मंदी का खेल चल रहा है । हालांकि पामतेल का भारतीय बाजार भाव नहीं गिरा । पामतेल भाव गत् हप्ते पूर्ववत बने रहे । अमेरिका तरफ सोयाबीन की पैदावार में इंजाफा और भारी स्टॉक के चलते वहां गिरावट होने का असर भी भारतीय सोयाबीन भाव पर पड़ा बताया जा रहा है । वैश्विक प्रभाव का असर और सोया डीओसी की निर्यात मांग में भारी कमी का असर रहा कि सोयाबीन भाव भी गिरते जा रहे थे । भाव 3500 से 3600 रु. तक होना बताए जा रहे थे । जबकि प्लंटो की डिलीवरी 3600 रु. के अंदर ही होना बताई जा रही थी । बाजारों से ली गई जानकारी के अनुसार खाद्यतेलों में भारी मांग घटी बताई जा रही थी । इससे धारणा प्रबल है कि आगे भी मंदी की चाल रहने वाली है ।  दूसरी तरफ पामतेल के आयात प्रभावित होने और उसमें मांग में आई कमी से मूंगफली तेल की तरफ जन मानस का रुझान बढ़ने से मूंगफली तेल में तेजी होना बताई जा रही थी । इस वर्ष सोयाबीन और मूंगफली दोनों का भी उत्पादन सामान्य से कही अधिक होने की धारणा है। सरसों, रायडा की भी इस वर्ष अच्छी पैदावार हुई बताते है। इससे भारी आवकों के बीच थोक मंडियों में सरसों रायडा के भाव गिरे बताए गये है । सरसो  भाव 2450 से 3500 और रायडा का भाव 3300 से 3400  रु. तक होना बताए जा रहे थे ।  
सरकार ने पुन: खाद्यतेलों पर आयात शुल्क में कमी करने की समीक्षा की है  जिससे भी खाद्यतेलों के भावों पर अंकुश रहने की धारणा है । आयात शुल्क घटने की क्रिया से तेल मंदी में रहेगा जिससे तेल उद्यााथग जगत पर प्रभाव रहेगा । उधर हालांकि सट्टेबाजों ने  तिलहनें के भावों की मंदी मार रखी है  जिससे किसान परेशान है । किसानों की वाचाल सुने तो सट्टा प्रवृत्ति भारी बढ़ती जा रही है जिससे भारतीय बाजारों को अधिक सट्टा करने को बल  मिलता रहा है ।  बहरहाल इंदौर में गत् हप्ते मूंगफली तेल 12800 से 1290 रु., मुंबई मूंगफली तेल 1270 रु.., गुजरात लूज 1240-1250 रु. और राजकोट तेलिया 1960 से 1980 रु. के भाव रहे । इंदौर सोया रिफाइंड 770 से 775 रु.,इंदौर साल्वेंट 720 से 725 रु., मुंबई सोया रिफाइंड 762 से 765  रु., मुंबई पाम 710, इंदौर पामतेल भाव 770 रु. के भाव रहे । इंदौर कपास्या तेल. 715 रु.।

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