पोल्ट्री उपभोक्ताओं का रुझान दलहन की ओर, भाव बढ़ने की उम्मीद

पोल्ट्री उपभोक्ताओं का रुझान दलहन की ओर, भाव बढ़ने की उम्मीद
पोल्ट्री उत्पाद चिकन एवं अंडों से कोरोना वायरस होने की बात फैलने से अब ऐसे उत्पादों के उपभोक्ता दलहन की ओर मुड़ रहे हैं जिससे आने वाले दिनों में दालों के भाव बढ़ सकते हैं। तुअर एवं चने की दाल में प्रोटीन भरपूर होने से इनकी मांग बढ़ रही है। इंडियन प्लसेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के चेयरमैन जवेरचंद भेडा का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से स्थानीय एपीएमसी में दलहन की मांग बढ़ी है। कोरोना वायरस की वजह से नॉन-वेज खाने वाली आबादी शाकाहार की ओर मुड़ रही है। यह मांग लंबे समय तक रहने की उम्मीद है। 
एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट बिमल कोठारी का कहना है कि इस समय दलहन में अच्छी मांग देखी जा रही है। हालांकि, मौजूदा मांग दलहन के भाव को तत्काल प्रभावित नहीं करेगी। भाव स्थिर हैं। देश में दलहन का खासा उत्पादन हुआ है एवं सरकार के पास पर्याप्त दलहन है एवं आयात कोटा भी अच्छा दिया गया है। इस समय अधिकतर दलहन अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बिक रही हैं। अनेक कारोबारियों का कहना है कि अगले दो से तीन सप्ताह में दलहन की बढ़ी मांग साफ तौर पर दिखाई देगी क्योंकि लोग नॉन-वेज को खाने से बच रहे हैं। 
बता दें कि वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) में दलहन उत्पादन 230.2 लाख टन रहने का अनुमान है जो वर्ष 2018-19 में 220.8 लाख टन था। आल इंडिया दाल मिल्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुरेश अग्रवाल का कहना है कि इस साल दलहन की खपत पांच से सात प्र.श. बढ़ने की उम्मीद है। यदि विदेश से दलहन की मांग आती है तो भारत का निर्यात बढ़ेगा एवं इंडस्ट्री इसके लिए तैयार है। बता दें कि देश से अप्रैल-दिसंबर 2019 के दौरान दलहन निर्यात 31% घटकर 1.635 लाख टन रहा जो पूर्व वर्ष में समान अवधि में 2.36 लाख टन था।

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