लॉकडाउन : वस्त्र नगरी इचलकरंजी पर होगा असर

25 लाख मीटर सूती कपड़ा होगा खराब 
हमारे संवाददाता
कोरोना के चलते देश में सभी जगह लॉकडाऊन होनेसे इसका बडा असर वस्त्रनगरी इचलकरंजीपर हुआ है। शहर के लगभग 21 प्रोसेस में 25 लाख मीटर भिगा हुआ सुती कपडा खराब होने की संभावना है। इससे प्रोसेसधारकोंको चार करोड का नुकसान होने की संभावना है। ऐसी स्थिती में सुती कपडे का माल सुखाने की जरूरत है। 
कोरोना की साथ का फैलाव रोकने के लिए अलग अलग कोशीशे की जा रही है। इसके लिए जनता कर्फ्यू पुकारा था। लेकिन उस समय लोगोने सही तरीके से जिम्मेदारी नही निभाने के चलते सरकारने लॉकडाऊन जाहीर किया। सभी उद्योग बंद रहे। इचलकरंजी के हॉन्ड प्रोसेससे प्रक्रिया किया जानेवाला 25 लाख मीटर सुती कपडा है वह उसी अवस्था में पडा रहा। इस गिले कपडे का समय में सुखाया नही तो वह खराब होने की संभावना है। इचलकरंजी में लाखो मीटर कपडा तयार होता है। पावरलूमपर सुतसे कपडा तयार होने के बाद प्रोसेसमें उसपर अलग अलग प्रक्रिया की जाती है और कपडे को परिपूर्ण दर्जा दिया जाता है। प्रोसेसमें तयार हुए कपडे का सोडियम क्लोराईडमें ब्लिचिंग किया जाता है। उसके बाद कपडा सुखाना जरुरी है। जबकि लॉकडाऊनसे कारखाना, प्रोसेस पुरी तरह बंद होनेसे कपडा सुखाने की प्रक्रिया पुरी तरह रुकी हुई है। 
गिले सुती कपडे का नया संकट 
पहलेसेही बिजली के बढे हुए दर, कामगारोंकी और प्रदूषण के आरोप में फंसे प्रोसेसधारकोंके सामने अब गिले कपडे का नया संकट पैदा हुआ है। अब प्रोसेस बंद होते हुए भी प्रतिदिन सीईपीटी को 600 से 700 रुपए खर्चा देना पडता है। हरदिन लगभग 50 हजार मीटर सुती कपडा तयार कर एक लाख रुपए का उत्पन्न मिलता था लेकिन अब लॉक डाऊनसे धोती, बुट्टा साडी, उपरणे, साडी फॉल, फेटा, अस्तर का कपडा यह सभी रुका हुआ है। 
कपडा सुखाने के लिए अनुमति दे 
इचलकरंजी में पावरलूम उद्योग बडे पैमाने पर होनेसे प्रोसेस की संख्या भी बडे पैमाने पर है। लॉकडाऊन की स्थिती में 21 प्रोसेस में लगभग पांच करोड रुपए का लगभग 25 लाख मीटर कपडा पडा हुआ है। यह नुकसान टालने के लिए शासन कपडा सुखाने के लिए अनुमति दे। 

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