कोरोना वायरस : मजहबी अवरोध?

महामारी के खिलाफ जंग में हमें प्रारंभिक सफलता मिलने के बाद अब केस बढ़ रहा है और मरने वालों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। इसके लिए हमारा ढीलापन नहीं है, बल्कि निजामुद्दीन की घटना जवाबदार है और इस घटना को मजहबी रंग न चढ़े उसके लिए सरकार सावधान थी लेकिन कई संगठनों और राजनितिक नेताओं ने मजहबी भाषण और आक्षेप शुरू किया है। जांच करने आती पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर हमला, पत्थरबाजी शुरू की है । क्वारंटाइन में कर्मचारियों पर हमला किया जाता है, थूका जाता है!  
महामारी को रोकने का प्रयास उसके खिलाफ अवरोध और विरोध होता है। धर्म, मजहब के नाम पर यह खतरनाक मोर्चा है। दूसरी तरफ - फेक - गलत समाचार देनेवाले न्यूज़ चैनल के खिलाफ कानूनी शिकायत होती है ऐसे में अखबारी स्वतंत्रता जोखिम में होने का शोरगुल शुरू हुआ है। इस तरह महामारी का जंग जीता जा सकता है ? यह जंग सेक्युलर है - सभी धर्मियों को बचाने के लिए मानव धर्म है। इस वातावरण में अनेक समझदार - जवाबदार मुस्लिम संगठनों ने जुम्मा की नमाज घर में ही पढ़ने की अपील की है। निजामुद्दीन से वापस आये लोगों के कारण चेप फैला है। मुंबई में भी संख्या बढ़ी है, इसलिए शरद पवार ने जरूरत पड़ने पर सेना बुलाने की बात की है, जो उचित है । वास्तव में देश भर में जहां - जहां उपद्रव बढ़ा है और लोग हिंसक विरोध कर रहे हैं वहां सेना बुलानी चाहिए। 
पिछले कुछ दिन में जो नए केस मिले हैं वे चिंताजनक हैं और मजहबी प्रचार - पुलिस पर हमला होना यह अधिक चिंताजनक है। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत कर लॉक डाउन उठा लेने के बाद की  रणनीति के लिए सुझाव मांगा है अर्थात आगामी एक सप्ताह में लॉक डाउन में कहां - कितनी छूट चरणबद्धरूप से देने का निर्णय लिया जायेगा। मेडिकल टीम को सुरक्षा देने की पक्की व्यवस्था हो रही है। 
कोरोना वायरस डिसीज-19 कोविद-19 का आतंक आज विश्वभर में व्याप्त हैI युद्धस्तर पर  इसका प्रसार रोकने और जनजीवन बचाने के लिए प्रयास हो रहा हैI क्योंकि, यह एक प्रकार का 'विश्वयुद्ध - तीसरा है' इस युद्ध में शस्त्र  नहीं लेकिन महामारी हैI निशाने पर जनजीवन और विश्व की अर्थव्यवस्था हैI इस विश्वयुद्ध में कितनी जन हानि होगी, कितने व्यापार- उद्योग बंद होंगे, बेकारी कितनी बढ़ेगी और दुनिया के देश कब  अपने पांव पर खड़े होंगे? इस प्रश्न का जवाब किसी  के पास नहीं है ! आकार्य की बात यह है की इस महामारी को जन्म देनेवाला चीन मात्र दो ही महीने में मुक्त और स्वस्थ होने का दावा कर रहा हैI 
विश्वभर में धुरंधर नेताओं और समृद्धि के साथ शक्तिवान महासत्ता अमेरिका भी आज लाचार है और 'चाइना वायरस ' से विश्व में हाहाकार मचाने वाले चीन को दोषी मान रहा हैण् प्रमुख ट्रम्प के आक्षेप और आरोप के बावजूद चीन के प्रमुख शी जिनपिंग चुप बैठे है ! क्यों ? यह महामारी साउथ कोरिया, यूनाइटेड किंगडम - ब्रिटेन, इटली, स्पेन और एशिया के देशों भारत सहित  170 देशों में फैला है लेकिन रशिया और उत्तर कोरिया 'सुरक्षित ' है ! किस लिए ? प्रमाण - साबित होने के साथ एक मजबूत धारणा यह है कि विश्व को थर्रा देनेवाली अर्थव्यवस्था को पायमाल कर चीन एकमात्र महासत्ता बनाना चाहता हैI अमेरिका आज सबसे शक्तिशाली देश हैI सोवियत संघ विखर जाने के बाद विसात में नहीं हैI एकमात्र चीन है, जो अमेरिका को चुनौती दे सकता हैI वर्तमान का 'ट्रेड वार' तो ट्रेलर माना जा रहा है चीन अमेरिका की समृद्धि - आर्थिक ताकत तोड़ना चाहता हैI यह शुरुआत है ।
  30 दिसंबर, 2019 में जिन डॉक्टरों ने कोरोना वायरस का केस पकड़कर अन्य डॉक्टरों को सावधान किया उनके खिलाफ लोगों में घबराहट फैलाने का आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया गयाI यह महिला डॉक्टर और अन्य साथी डॉक्टर वायरस की बलि चढ़ गए हैंI इस वायरस का जन्मस्थान वुहान में 'सी फ़ूड बाजार' समुद्र के जीवित जलचरों का बाजार हैI यहाँ नाम न सुना हो इस प्रकार के प्राणियों के अलावा सांप, अजगर, नेवला अनेक प्रकार के पशु पछियों को पिजड़े में ग्राहक पसंद करते हैं फिर क़त्ल कर बिकता हैI  जीवित कीड़े मकोड़े भयानक गन्दगी और रोग से ग्रसित जीव चीनियों के पेट में जाते हैण् इस बाजार के कंपा देनेवाले ऐसे दृश्य का क्लिप पहले वायरल भी हो चुका है और 'नेटफ्लिक्स' पर 12 मिनट की फिल्म भी हैI हमारी आजादी के बाद चीन में 'लोगों की आजाद चीनी फौज' पीपल्स सेलिब्रेशन आर्मी - सफल हुई . माओत्से तुंग और चाउ- ऐन - लाइ (ये दोनों उच्चारण गलत हैं लेकिन तत्कालीन में सही थे इसलिए दोनों चीनी नेताओं के नाम अभी भी सभी को याद हैं) भारत भी आया थाI नेहरू का विशेष मेहमान थाI हिंदी - चीनी भाई - भाई होने के बाद इसी वर्ष में 1962 में हिमालय पर आक्रमण कियाI इसके शासनकाल में चीन में भुखमरी हुईI साम्यवादी सरकार ने खेती की जमीन ले ली थीI माओ ने  लोगों को आव्हान कर जो मिला उसे खाने लगेI टेबल - कुर्सी के सिवा कुछ भी खाने की छूट - आकाश में पक्षी भी साफ हो गएI शहर के पक्षी जंगलों के पशु और जलचर चीनियों के गोदाम-पेट में गएI समय बीतने के साथ नियंत्रण आया लेकिन 'भद्रवर्ग' के लोगों का स्वाद बदल गया था ! इसके बाद सामान्य वर्ग को भी चस्का और अब महामारी का चेप लगाI   
कोरोना के वायरस का जन्म इस बाजार में हुआ लेकिन संभव है की चीन के सत्ताधीशों ने इसका उपयोग शस्त्र के तौर पर किया होI मान्यता यह है कि विषाणु युद्ध के लिए चीनी शासकों ने ही संशोधन कर सफल प्रयोग किया है और इसका तोड़ - इलाज भी ढूंढ लिया है, इलसिए ही चीन में महामारी नियंत्रण में आ गयी है I लोग मरते थे  यह साचार चीन की दीवार कूदकर बाहर नहीं आया लेकिन स्वस्थ चीनी सुंदरियों की फोटो वायरल हुए! चीनी प्रमुख शी जिनपिंग सामान्य 'मास्क' पहनकर दुनिया को फोटो दिखाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में गए ! सामान्य रूप से कोई भी प्रमुख नखशिख - सिर से पाँव तक सुरक्षा चक्र से ढँक कर आते हैं । ऐसी जरूरत क्यों नहीं पड़ी ? 
विशेषज्ञों का कहना है की वायरस का पहला केस पकड़ने के बाद तीन सप्ताह के अंदर 14 दिन में 12,000 बेड-खाट वाले हॉस्पिटल बना लिए गए !  और हमने कहते हुए देखा ? चीन की कार्यकुशलता कैसी है ? ! चीन ने घोषणा भी की कि हमारे पास टीका भी है इतने कम समय में टीका किस तरह ढूंढ लिया ? कुछ वृद्ध चीनियों की बलि देश की सुरक्षा - सत्ता के लिए ली गयी उससे क्या ? पेंशनरों की संख्या कम होगी लेकिन फायदा काफी है ! वैसे भी शासकों को चीन की बस्ती का 'लाभ' लेना अच्छी तरह से आता है। हिमालय पर आक्रमण करते समय हज़ारों की संख्या में चीनी प्यांदा जैसे सैनिकों को भारत के सामने आगे कर 'ढाल' बनाया फिर चीनी फौज आयी, मंद गति से हजारों सैनिकों में से थोड़ा आगे बढे। 
प्रश्न यह है की चीनी प्रमुख चुप क्यों है? महामारी का उपाय है तो अन्य देशों को क्यों नहीं दिया जा रहा है ? मात्र इटली में चीनियों की संख्या अधिक, अनेक क्षेत्रों में बहुमत है, वहां डॉक्टरों की टीम भेजा ऐसी अफवाह है। महामारी का टीका दुनिया को देने से पहले वह अमेरिका को घुटने पर टिकाना चाहता है वह सशस्त्र - लेजर युद्ध किये बगैर जीतकर एकमात्र महासत्ता बनेगा ? या फिर विश्व में चीन के खिलाफ आवाज उठेगी ?  
जहाँ तक भारत का सम्बन्ध है वहां तक तात्कालिक कदम - घरबंदी - तालाबंदी की घोषणा हुई और आलोचकों ने कहा की अमेरिका की तरह राहत पैकेज क्यों घोषित नहीं हुआ । वित्त मंत्री के द्वारा  पैकेज घोषित करने के बाद रिज़र्व बैंक ने भी राहत की घोषणा की है । निजी क्षेत्र का पूरा सहयोग है और विपक्ष ने भी समझदारी दिखाई है लेकिन यह लड़ाई लम्बी चलेगी महीनों नहीं वर्ष़ों लगेंगे अर्थव्यवस्था को सुधरने में, लेकिन मुख्य चिंता लोगों के सहयोग की है। धारावी जैसी झोपड़पट्टी में सामाजिक - अंतर और स्वच्छता कहाँ से मिल सकती है? मौलवियों को मना करने के बावजूद पाकिस्तानी मौलवियों की बात सुनकर लोग नमाज पढ़ने मस्जिद में जाये और महानगरों में 'भद्रलोग' मजा लेने निकलें तो महामारी पर नियंत्रण किस तरह आएगा ?  

© 2020 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer