लॉकडाउन में फंसे चावल के कारोबारी और निर्यातक, गोदामों में लाखों टन स्टॉक

लॉकडाउन में फंसे चावल के कारोबारी और निर्यातक, गोदामों में लाखों टन स्टॉक
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई । कोरोना वायरस के महा प्रकोप ने चावल के कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। उनके देशी और विदेशी सारे आर्डर रद्द हो रहे हैं। खाड़ी देशों से लेकर ब्रिटेन, अमेरिका और ईरान और दुनिया के लगभग सारे देशों में कोरोना के प्रसार ने इकोनोमी को तबाह कर दिया है। भारतीय चावल के कारोबारियों को समझ में नहीं आ रहा कि वे नई फसल लगाएं या गोदामों में पड़े लाखों टन चावल के स्टॉक को बचाएं। 
चावल के कारोबारी अपने इस नुकसान को पाटने के लिए आईसीईएक्स जो कि एक सेबी विनियमित ऑनलाइन पारदर्शी एक्सचेंज है, पर बासमती धान के वायदा चल रहे हैं, पर वायदा कारोबार करके अपने नुकसान को हेज करने में लगे हैं। इस कारण से आईसीईएक्स पर गत दिनों बासमती धान के वायदों में उल्लेखनीय कारोबार देखा गया। यहां तकरीबन जो पहले 13 करोड़ रुपए के सौदे हो रहे थे, अब 20 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। परिणामस्वरुप बासमती धान की कीमतों में गत दिनों में 150-200 रुपए की मजबूती दर्ज की गई है। हरियाणा और पंजाब के तकरीबन तीन सौ निर्यातक कंपनियों की हालत खराब है तथा इनसे जुड़े 1000 से अधिक राइस मिल संचालकों के कामकाज कोरोना के संकट में फंस गये हैं। 
कोरोना का चावल के कारोबारियों पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है। कारोबारियों के अनुसार बीते पांच महीनों में भारत से केवल 10-12 लाख टन ही बासमती चावल का निर्यात हुआ जो सामान्य परिस्थिति में 50 लाख टन तक पहुंचता है। कोरोना वायरस के वैश्विक संकट से जूझ रहे देशों में अब निर्यात तकरीबन पूरी तरह बंद है। खाड़ी देशों में भारत के हरियाणा के बासमती चावल की ज्यादा मांग रहती है। आज ये बिलकुल समाप्त हो गई है। 
हरियाणा राइस मिल एक्सपोर्ट्स एसोसिएसन के अध्यक्ष सुशील जैन के मुताबिक पूरे हरियाणा में राइस की मिलें बंद हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने  आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इसकी छूट दी है, लेकिन न तो घरेलू आर्डर हैं और न हीं विदेशी। ऐसे में मिल क्या करें। पुराने आर्डर की सप्लाई भी नहीं हो पा रही है। राइस मिलों की चिंता गहराने लगी है कि उनके गोदामों में पड़े चावल के स्टाक का क्या किया जाए। लॉकडाउन के कारण लेबर भी नहीं मिल रहे हैं। श्री जैन ने कहा कि अगर उनके स्टॉक खाली नहीं हुए तो सितंबर में नई फसल की बुआई का संकट आ जाएगा। किसान बासमती चावल उगाने से हिचकेंगे। 
श्री जैन ने कहा कि बासमती के धान खुले में पड़े हैं। डर है कि कहीं इनकी क्वालिटी धूप और पानी के कारण अंतराष्ट्रीय स्तरों पर विफल न हो जाएं। इनका भंडारण बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि यदि इसका समाधान नहीं हुआ तो चावल के कारोबार पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। निर्यातक भी परेशान हैं। इनके भी तकरीबन तीन लाख स्टाक बंदगाहों पर फंसे पड़े हैं। 
एक बात साफ है कि कोरोना के प्रकोप से ग्रसित अमेरिका, ब्रिटेन, ईरान और खाड़ी देशों के साथ विश्व के अन्य देशों की मार भारत के बासमती कारोबारियों, किसानों और निर्यातकों पर पड़ी है। ऐसे में बासमती के धंधे से जुड़े लोगों को खुद ही अपने लिए एक सही रास्ता निकालना होगा। फिलहाल यह रास्ता अपने माल को आईसीईएक्स जैसे देश के भरोसेमंद वायदा एक्सचेंजों में हेज़ करने के साथ ही इसमें उचित ढंग से निवेश करके ही निकल सकता है और इस तरह से मौजूदा स्थिति का फायदा वायदा कारोबारियों के साथ-साथ किसान और बासमती के अन्य कारोबारी व एजेंट भी उठा सकते हैं। 

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