कोरोना वायरस से चीनी निर्यात की कहानी का अंत

कोरोना वायरस से चीनी निर्यात की कहानी का अंत
नई दिल्ली। कोरोना वायरस की मार से समूची दुनिया बच नहीं सकी है तो चीनी भी अपवाद नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रॉ शुगर इंटरकांटीनेंटल एक्सचेंज में 12 फरवरी को तीन साल की ऊंचाई पर 15.9 सेंटस प्रति पाउंड चल रही थी जो अब 18 महीने के निचले स्तर 10.45 सेंटस प्रति पाउंड आ गई है। कोरोना वायरस के फैलने एवं क्रूड तेल के दाम फिसलने से घटी मांग ने चीनी के दाम घटाएं हैं। चीनी के घटे इस दाम से ब्राजील को ज्यादा फायदा हुआ है। 
चीनी के दाम 34 फीसदी घटने से भारत का चीनी निर्यात होना अब कठिन हो गया है एवं ताजा सौदे रुक गए हैं। इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि एक दशक में सबसे अधिक चीनी का निर्यात हो पाएगा। फरवरी की शुरुआत में जब चीनी के वैश्विक दाम बढ़े थे तो भारतीय चीनी मिलों को निर्यात की अच्छी उम्मीद थी। उस समय चीनी का निर्यात आसानी से 50 लाख टन पहुंचता दिख रहा था लेकिन अब यह अनुमान 40-45 लाख टन के बीच नजर आ रहा है। एक निर्यातक का कहना है कि चीनी निर्यातक नुकसान में हैं। पिछले दो महीने जैसा निर्यात नहीं दिख रहा। अंतिम सौदा 24-25 रुपए प्रति किलोग्राम पर हुआ था, अब मिलें भावो में कटौती कर रही हैं। भाव तेजी से गिर रहे हैं। वर्तमान में एक्स-मिल भाव रॉ शुगर का 18 रुपए प्रति किलोग्राम है जबकि व्हाइट शुगर 20-20.5 रुपए है। 
वैश्विक एवं घरेलू बाजार के बीच भाव अंतर को पाटने के लिए सरकार ने 10.45 रुपए की प्रति किलोग्राम सब्सिडी देने का फैसला किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम घटने से आयातक भारत से दूर हो गए हैं। साथ ही कई बंदरगाहों के बंद हो जाने से कारोबार रुक गया है। भारतीय चीनी निर्यातकों को जल्दी राहत मिलने के आसार नहीं है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय भाव जलदी सुधरते दिखाई नहीं दे रहे। ब्राजील में वर्ष 2020-21 (अप्रैल-मार्च) में चीनी उत्पादन 340 लाख टन होने के आसार हैं। जबकि, पिछले सीजन में 265 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। ब्राजील से चीनी का निर्यात 180 लाख टन की तुलना में इस साल 290 लाख टन पहुंचने के आसार हैं। हालांकि, भारतीय इंडस्ट्री को 30 सितंबर को समाप्त होने वाले मार्केटिंग वर्ष में चीनी निर्यात 50 लाख टन पहुंच जाने की संभावना दिख रही है।

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