जीरा वायदा में सट्टेबाज हावी, फसल-मांग में कोई परिवर्तन नहीं

जीरा वायदा में सट्टेबाज हावी, फसल-मांग में कोई परिवर्तन नहीं
कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स में जीरा वायदा में जबरदस्त उथल पुथल हो रही है जिसे हाजिर कारोबारी पूरी तरह सटटेबाजी की देन बता रहे हैं। जीरे के हाजिर बाजार पूरी तरह लॉकडाउन होने से न तो जीरे की निर्यात और न ही घरेलू बाजारों में पूर्ति हो पा रही है और न ही किसान मंडियों में जीरा ला पा रहे हैं तो कैसे इसमें जबरदस्त  उतार-चढ़ाव हो रहा है।
कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स में 26 मार्च को जीरा अप्रैल वायदा ऊपर में जहां 15130 रुपए प्रति क्विंटल बिका, वही अब यह नीचे में 13900 रुपए बिक रहा है। 26 मार्च को ऊपरी स्तर छूने के बाद भी यह नीचे में  14000 रुपए प्रति क्विंटल आया था ।  इससे साफ है एनसीडीईएक्स सटटेबाजों की पकड़ में है एवं वोल्यूम साफ बताता है कि इसमें आम कारोबारी या किसानों की भागीदारी नहीं है। यदि एक्सचेंज में इसी तरह कारोबार हुआ तो हाजिर बाजारों के खुलने पर जीरे का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, क्योंकि आयातक प्राइस मूवमेंट को जरुर ध्यान रखते हैं। हालांकि, कुछ कारोबारियों का कहना था कि एनसीडीईएक्स में जीरा वायदा 14500 रुपए प्रति क्विंटल के ऊपर आने पर इसमें बिकवाली करनी चाहिए क्योंकि जीरा उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ा है एवं इस साल उत्पादन भरपूर है। देश भर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन होने से कही से कोई मांग नहीं है। 
देश में जीरा उत्पादक मुख्य राज्य गुजरात एवं राजस्थान हैं। गुजरात में लॉकडाउन से पहले ऊंझा मंडी में 11-11.50 लाख बोरी (प्रति बोरी 55 किलोग्राम) जीरे की आवक हुई है। इस आवक में 80 फीसदी से ज्यादा जीरा गुजरात राज्य का है जबकि राजस्थान के जीरे की आवक कम थी। अभी तक गुजरात में ही जीरे की कटाई हुई है जबकि राजस्थान में इसकी कटाई हो रही है एवं आवक होना बाकी है। जीरे के उत्पादन में कोई फर्क नहीं पड़ा है। मौजूदा बारिश से भी इसकी उपज में पांच फीसदी से ज्यादा कमी नहीं होगी एवं जो रेन डैमेज होगा, वह भी घरेलू बाजार में खप जाएगा। 
फैडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स के मुताबिक देश से इस साल जीरे का उत्पादन 535500 टन होने का अनुमान है। यह उत्पादन पिछले रबी सीजन 2019 में 416600 टन था। जीरे का यह उत्पादन वर्ष 2018 की तुलना में 29 फीसदी ज्यादा है। फैडरेशन के मुताबिक देश में वर्ष 2019 में जीरे के कुल रकबे में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। गुजरात में रकबा 40 फीसदी बढ़ा है लेकिन राजस्थान में यह 16 फीसदी ही बढ़ा है। इस साल जीरे के कुल यील्ड में तीन फीसदी बढ़ोतरी की संभावना है। जीरे के उत्पादन को बोरी में परिवर्तित किया जाए तो इस साल 9736282 बोरी (प्रति बोरी 55 किलोग्राम) जीरा पैदा होने का अनुमान है। यह उत्पादन वर्ष 2019 में 7574527 बोरी था। 
जबकि, गुजरात कृषि विभाग द्धारा जारी रबी सीजन के पहले अग्रिम अनुमान में बताया गया है कि चालू रबी सीजन में जीरे की बोआई 474000 हैक्टेयर में हुई जबकि राज्य में 311940 टन जीरा पैदा होगा जबकि पिछले सीजन वर्ष 2018-19 में यह उत्पादन 199980 लाख टन था। इस साल प्रति हैक्टेयर जीरा 658.10 किलोग्राम पैदा होने का अनुमान लगाया गया है जो पिछले सीजन में 572 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर था।

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