कोरोना के कारण भारत को फिर से राजकोषीय घाटे के मुद्रीकरण की ओर मुड़ना पड़ेगा : डॉ. सी. रंगराजन

कोरोना के कारण भारत को फिर से राजकोषीय घाटे के मुद्रीकरण की ओर मुड़ना पड़ेगा : डॉ. सी. रंगराजन
मुंबई । रिजर्व बैंक के भूतपूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के भूतपूर्व चेयरमैन तथा अर्थशास्त्री डॉक्टर सी. रंगराजन ने कहा कि कोरोना वायरस और उसके फैलाव को रोकने के लिए जो तालाबंदी की गई है, उसके कारण सरकार के खर्च में वृद्धि होगीण् उसके कारण जो अधिक कर्ज होगा, उसका मुद्रीकरण करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं हैण् राजकोषीय घाटा बढ़ने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उलझन इतनी ही है कि और कर्ज कहां से आएगा और उसके लिए जो सरकारी बांड जारी किया जाएगा, उसे कौन लेगा? 
मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए लगता है कि रिजर्व बैंक को प्राइमरी या सेकेंडरी मार्केट द्वारा सरकार को सपोर्ट करना होगाण् लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि रिजर्व बैंक ने अभी तक समझदारीपूर्वक जो नीतियां अपनाई है उन सब का त्याग कर दिया जाएण् उन्होंने आगे कहा कि यदि राजकोषीय घाटे में बहुत ज्यादा वृद्धि हो तो मुद्रास्फीति में ज्यादा वृद्धि हो सकती हैण् इस समय इस घाटे को मौजूदा सीमा 3% से बढ़ाकर दुगनी करने की जरूरत हैण् केंद्र और राज्यों के बजटीय घाटे को ध्यान में रखे तो घाटा जीडीपी का 10% हो सकता है ।

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