अस्पतालों में चादरों व कपडे की मांग

हमारे संवाददाता
दो माह बीतने के साथ ही कपडा उत्पादको को नये नियमो के चलते ही मषीनो को चलाने की अभी तक हिम्मत नही हो रही है। कपडा उत्पादको को कहना है कि नगर से जब तक पूरी तरह से सील नही हट जाती है तब तक व्यापारिक गतिविधिया सामान्य होने वाली नही है। देषभर के अस्पतालो मे काम आने वाली चादर की माँग को ध्यान मे रखते हुए ही चादर कारोबारी चादरो को तैयार करने मे लगे हुए है। टासपोर्ट भी अभी तक बंद चल रही है। इन दिनो केवल पी पी सेट व मास्क बनाने को काम घर घर चल रहा है।  
व्यापारिक सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार कारखानो मे अभी तक कपडे का उत्पादन बंद ही चल रहा है। कारखाना मालिको को कहना है कि सूत के कारोबारियो ने अपने प्रतिश्ठानो को बंद कर रखा है। ट्राँसपोर्ट बंद चल रही है। उधर नये नियमो के तहत कारखाना मालिक अभी तक मषीनो को चलाया जाये अथवा नही इसी मंथन मे लगे हुए है।  
 नगर के कुद कारोबारी अस्पतालो की माँग को देखते हुए चादरो का उत्पादन करने मे लगे हुए है। बडी संख्या मे चादरे तैयार भी है। थोडा बहुत माल बाहर के कारोबारी आकर के यहाँ से ले भी जा रहे है। अभी चादरो व कपडे मे काम तो हो रहे है लेकिन खुलकर के नही हो रहे है।  
 कपडा कारोबारी इन दिनो कपडे के मास्क बनाने के अलावा चिकित्सा के क्षैत्र मे काम आने वाले बडी संख्या मे मास्को का उत्पादन कर रहे हैं । मास्क अनेक क्वालिटिया बन रही है। अब मास्क मे बहुत माल बनने के साथ ही इसके भावो मे गिरावट आयी है। पिलखुवा के आसपास लगने वाले गाजियाबाद व नौएडा के खुलने के साथ ही तैयार मालो की सप्लाई आसानी से होने के साथ ही सप्लायरो को अब आसानी होने लगी है।  
व्यापारियो को कहना है कि इन दिनो जो भी कामकाज हो रहे वह उध्णार न होकर के नकद मे ही हो रहे है। नगर  मे होने वाली सभी प्रकार की व्यापारिक गतिविधिया नकद मे ही हो रही है। नकद लेनेदेन से बाजारो मे धन का प्रवाह ठीक बना हुआ है।

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