मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में टिड्डी झुंडों से फसलों को नुकसान

मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में टिड्डी झुंडों से फसलों को नुकसान
हमारे संवाददाता  
नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के कई  हिस्सों में राजस्थान से होते हुए टिड्डी दलों ने अपनी आमद दर्ज करा दी है। जिससे गरमा फसलों को नुक्सान की आशंका बढ़ गई है। वहीं प्रशासन द्वारा मुआयना कराकर किसानों को आपदा के प्रकोप से निपटने के लिए सतर्क किया जा रहा है। 
दरअसल कृषि विभाग की तरफ से कहा गया है कि टिड्डी के झुंड राजस्थान से होता हुआ नीमच, मंदसौर,आगर मालवा और झाबुआ पहुंच रहा है। यद्यपि टिड्डियों का कारवां कई किलोमीटर लंबा है और यह खेतों में उतरकर फसलों को नुक्सान पहुंचा सकता है। वहीं आगर मालवा जिले कृषि विभाग के उपसंचालक  आर पी कनेरिया ने कहा कि टिड्डी झुंड के लगभग 15 किलोमीटर तक छाए हुए है। जिसको लेकर किसानों को सलाह दी गई है कि वह सतर्क रहें। ऐसे में जैसे ही टिड्डियों कोई झुंड पास आता है तो वह शोर करें टिड्डियों का झुंड भाग जाएगा। ऐसे में जिन जिलों में टिड्डियों के झुंड आने का खतरा है वहां के किसानों को मुनादी करने के साथ सतर्क किया जा रहा है।जिसको लेकर कहा गया है कि टिड्डियों को भगाने के लिए ध्वनि विस्तार यंत्र जैसे मांदल, ढोलक,डीजे, ट्रेक्टर  का साइलेंसर निकालकर आवाज करना,खाली टीन के डिब्बे,थाली आदि स्थानीय स्तर पर तैयार रखें, सामूहिक प्रयास से ध्वनि विस्तार यंत्र का उपयोग करें। ऐसा करने से टिड्डी झुंड नीचे नहीं आकर फसल या वनस्पति पर नहीं बैठते हुए आगे चला जाएगा। 
वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि टिड्डियों का आगमन शाम को लगभग छह से आठ बजे के बीच होता है और सुबह साढ़े सात बजे तक दूसरे स्थान के लिए प्रस्थान करने लगता है।ऐसी स्थिति में टिड्डी का प्रकोप होने पर तत्काल बचाव के लिए उसी रात की सुबह तीन बजे से लेकर साढ़े सात बजे तक रासायनिक दवाओं का छिड़काव कर टिड्डी झुंड पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बताया जाता है कि टिड्डी झुंड खेतों या पेड़ों, हरियाली में बैठते हैं एवं संपूर्ण फसलों को नष्ट करता है। इस आपदा पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अनुविभाग स्तर एवं जिला स्तर व राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।

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