सरसों की पेराई अप्रैल में 28 फीसदी घटी

सरसों की पेराई अप्रैल में 28 फीसदी घटी
जयपुर। देश मेंअप्रैल2020 में 6.50 लाख टन सरसों की पेराई हुई जो अप्रैल 2019 की तुलना में 28 फीसदी कम है। अप्रैल 2019 में सरसों की पेराई 9 लाख टन थी। यह जानकारी मस्टर्ड ऑयल प्रॉडयूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (मोपा) ने दी। 
मोपा के मुताबिक 24 मार्च से कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन से सरसों की क्रशिंग कम हुई है। लॉकडाउन की वजह से अधिकतर तेल मिलें बंद हैं एवं सरसों की क्रशिंग रुक गई है। साथ ही बाजार में सरसों की आवक बेहद कम होने से भी मिलों में क्रशिंग प्रभावित हुई है। 
मोपा के मुताबिक मार्च में सरसों की आवक 9.80 लाख टन रही जो अप्रैल 2019 में 15.5 लाख टन थी। मार्च में राजस्थान में 3.25 लाख टन,उत्तर प्रदेश में एक लाख टन और मध्य प्रदेश में 45 हजार टन सरसों की आवक हुई। किसानों,प्रोससरों,स्टॉकिस्टों और सरकारी एजेंसियों के पास 30 अप्रैल को 67 लाख टन सरसों का स्टॉक था। जबकि, 29फरवरी को इसका कैरीओवर स्टॉक पांच लाख टन था। 
बता दें कि सरसों की बोआई सितंबर-अक्टूबर में शुरु होती है एवं नई सरसों की आवक फरवरी से शुरु हो जाती है। मार्च से इसकी आवक में तेजी आती है लेकिन जून से ऑफ सीजन शुरु हो जाने से इसकी आवक सुस्त पड़ जाती है। 
मोपा के मुताबिक वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) में सरसों की पैदावार 76 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले सीजन में 81 लाख टन था। देश में कुल पैदा होने वाली तिलहन में सरसों की हिस्सेदारी 25 फीसदी होती है। केंद्र सरकार के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक चालू रबी सीजन में 87.03 लाख टन सरसों की पैदावार होने की संभावना है। 

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