बिक्री बढ़ाने के लिए बंपर छूट और कैशबैक का सहारा नहीं ले पाएगी कंपनियां

हमारे संवाददाता  
नई दिल्ली । ई-कॉमर्स कंपनियों की तरफ से बिक्री बढाने के लिए दी जाने वाली बंपर छूट का दौर शीघ्र ही समाप्त हो सकता है।जिसको लेकर ई-कॉमर्स नीति के दूसरे मसौदे में यह खाका तैयार किया है।जिसमें घरेलू ई-कॉमर्स कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।  
दरअसल ई-कॉमर्स सेक्टर को बेहतर तरीके से नियमित करने के लिए केद्र सरकार शीघ्र ही ई-कॉमर्स नीति का दूसरा मसौदा जारी करेगी।जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।इस नई नीति में इन कंपनियों की तरफ से दी जाने वाली छूट और डेटा लोकलाइजेशन के मामले में अधिक सख्त `ख अपनाने की तैयारी में है।इस नीति में घरेलू कंपनियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।यद्यपि नई नीति कब तक बनकर पेश होगी जिसका ब्योरा अभी नहीं मिल पाया है।जिसको लेकर उद्योग और आतंरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआईटी) के सचिव गु`प्रसाद महापात्रा अगले कुछ दिनों में अपनी टीम के साथ मसौदा नीति की समीक्षा करेंगे।जिसके बाद इसे केद्रीय वाणिज्य मंत्री को ह्लøश्रह्ल जाएगा।ऐसे में नई नीति में घरेलू कंपनियों को मजबूती देने की योजना है।जिसके तहत अभी अधिकतर ई-कॉमर्स कंपनियों में घरेलू कंपनियों को प्राथमिकता नहीं दी जाती है।जिसको लेकर घरेलू कंपनियों की तरफ से कहा गया था कि पिछले मसौदे में उनके हितों का संरक्षण नहीं था।ऐसे में केद्र सरकार की तरफ से इस मसौदे पर बैठक में ई-कॉमर्स कंपनियों की तरफ से दी जाने वाली अधिक छूट पर घरेलू कंपनियों की शिकायतों पर चर्चा करेगी।जिसको लेकर अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि नई नीति में मूल्य निर्धारण और इस पर मिलने वाली छूट को एक सीमा में रखने पर बात होगी।वहीं ई-कॉमर्स नीति के दूसरे मसौदे में डीपीआईआईटी अपनी तरफ से कई सुझाव दे सकता है।जिसमें उपभोक्ताओं का व्यक्तिगत डेटा देश के अंदर रखने की अनिवार्यता की शर्त रखी जा सकती है। 

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