छाता बाजार में रौनक : हाजिर माल की तंगी से भाव बढ़ा

हमारे प्रतिनिधि 
मुंबई  । कोरोना के कारण प्रवासी मजदूरों के चले जाने से इस बार छाते का उत्पादन 30 से 40% ही हुआ है. इस बार वर्षा समय से पहले शुरू हो जाने से और गुजरात में काफी अच्छी वर्षा होने से छाते की भारी मांग निकल पड़ी है. इससे नवंबर -दिसंबर में बुकिंग के समय जो भाव खुला था,  उससे प्रति नग 15 से 20 रुपया भाव बढ़ गया है.  चीन से कचे माल के कंटेनर तो बस दो से तीन ही आए हैं, लेकिन तैयार छाता चीन से 25 से 30% आया है.  चीन के छाते भी चपा चप बिक गए हैं. मुसाफिरखाना के व्यापारी जो चीन के छाते बेचते हैं, उनके पास अब माल नहीं है.  
पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद होने से प्रिंसेस स्ट्रीट- कालबादेवी  के थोक बाजार तक नहीं पहुंच सकते. इससे ग्राहक फोन पर या व्हाट्सएप पर ऑर्डर लिखाते है औघ  व्यापारी वह माल भेज देते हैं. आकार्य की बात यह है करोना के कारण सभी बाजारों में पेमेंट की साइकिल रुक गई है, लेकिन छाता बाजार में पेमेंट फटाफट आ जाता है.  
गुजरात में 21`स8 सलिया की फोल्डिंग साइज चलती है मुंबई में 24`स8 जंबो साइज चलती है. गांव में 25`स12 का लंबा छाता चलता है, जो फालना और अन्य सेंटरों में बनता है. इस लंबे छाते का नवंबर- दिसंबर में बुकिंग के समय भाव जो 75 से 80 रुपया था,  बढ़कर इस समय प्रति नग थोक भाव 110 रुपया चल रहा है. इस समय सीजन के माल ही सबसे अधिक बिकते हैं. जेंट्स फोल्डिंग जंबो छाते का भाव जो सीजन के आरंभ में 85 से 90 रुपया था, वह बढ़कर इस समय 120 से 125 रुपया बोला जा रहा है. लेडीज  फोल्डिंग छाते का भी यही भाव है.   कारीगरों के अभाव में छाते का उत्पादन कम हुआ है, लेकिन कच्ची सामग्री के माल जो पड़े हैं, उसके दाम घट गए है. छाते के कपड़े के पैनल 25स12 का प्रति दर्जन भाव जो 350 रुपया था, वह घटकर 300 रुपया रहा है.

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