नोटबुक का सिर्फ 25 से 30% ही उत्पादन : 10% भाव बढ़ा

स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा शुरू होने से रिटेल दुकानों में नोटबुक की खरीदी के लिए भागम भाग 
देवचंद छेड़ा 
मुंबई, कोरोना के लॉकडाउन के कारण और प्रवासी मजदूरों की कमी के कारण नोटबुकों  का उत्पादन सिर्फ 25 से 30% ही होने से भाव 10% बढ़ गया है.  
जनवरी से मार्च के दौरान नोटबुकों का जो उत्पादन हुआ था, उसी स्टॉक का माल ही अभी तक बिक रहा है. मार्च से लॉकडाउन के कारण मुंबई की फैक्ट्रियों में सिर्फ 10% ही उत्पादन हुआ है जबकि पालघर की फैक्ट्रियों में सिर्फ 25 से 30% ही उत्पादन हुआ है.  लॉकडाउन में स्कूल कब खुलेंगे वह निश्चित नहीं था. अंत में स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों को घर बैठे ऑनलाइन शिक्षा देना शुरू कर देने से विद्यार्थियों और अभिभावकों का रिटेल दुकानदारों के यहां नोट बुकों की खरीदी के लिए भागम भाग शुरू हो गई है. इसके बावजूद लॉकडाउन में स्कूल बंद रहने से अभिभावकों द्वारा स्कूल फीस भरने से इनकार किए जाने से ये  अभिभावक तो नोटबुकों का पैसा नहीं अदा करेंगे, यह हकीकत है. इसके कारण हर वर्ष स्कूल नोटबुक की उत्पादक कंपनियों के पास सीधे ऑर्डर दे देते थे, उन ऑर्डरों के माल अब ये स्कूल नोटबुक कंपनियों के पास से नहीं उठाते हैं. इसके अलावा मुंबई की लोकल ट्रेनें अभी बंद होने से ग्राहक अब्दुल रहमान स्ट्रीट के  थोक नोटबुक बाजार तक पहुंच नहीं सकते है. इससे नोटबुक बाजार 8 जून से ऑड ईवन आधार पर खुल जाने के बावजूद बाजार में ग्राहकी दिखाई नहीं देती. लोग अपने घर के पास के रिटेल दुकानों से ही नोटबुक की खरीदी कर रहे हैं. मात्र बाहरगांव अधिक खुल जाने और जहां ट्रांसपोर्ट से माल पहुंचाया जा सकता है, वहां बाहरगांव माल जा रहा है. हालांकि टेंपो भाड़ा, ट्रक भाड़ा और हमालों की मजदूरी बढ़ जाने से उत्पादन खर्च बढ़ गया है.  
इस बार ए -4 नोटबुक सबसे अधिक बिक रहे  है. इसके 160 पृष्ठ के नोटबुक का थोक भाव 25 से 30 रुपया है जबकि 180 पृष्ठ के बुक का भाव 30 से 35 रुपया है.  रेगुलर नोटबुक 17 सेंटीमीटर स 27 सेंटीमीटर 180 पृष्ठ का थोक भाव 22 से 27  है. स्कूलों में चलती नोटबुक जो 15.5 सेंटीमीटर स 19 सेंटीमीटर की साइज में आती है, उसके 180 पृष्ठ के नोटबुक का थोक भाव 20 रुपया और 84 पृष्ठ का भाव 12 रुपया है.  

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