सोलापुर टेक्सटाइल में कामकाज शुरू

हमारे संवाददाता   
सोलापुर । शहर में लगभग 800 से 900 टेक्सटाइल कारख़ानेवाले है और करीबन 12000 यंत्रमाग और 1500 आधुनिकयंत्रमाग है। इन सब से मिलकर 400 से 450 कारखाने शुरू हो गए हैं। बाकी सब बंद पड़े हुए हैं। इस टेक्सटाइलयंत्रमाग इंडस्ट्री में कुल मिलाकर करीबन 40 से 50 हजार कामगार है। इनमें से 20 से 25000 कुशल यंत्रमाग कारीगर है। इस घड़ी में इस टेक्सटाइल उद्योग में 20,000 से ज्यादा वर्कर कार्यरत है। 
इन सब कामगारों को पूर्णता कोरोनावायरस से बचाने के पूरे उपाय किए जा रहे हैं। सैनिटाइजर मास्क इन सब की खबरदारी लेते हुए मेडिकल चेक अप करने की सुविधा भी की गई है। 
सोलापुर टेक्सटाइल यंत्रमाग उद्योग से निर्मिती वस्त्र का व्यवसाय कारोबार सिर्फ दो क्षेत्रों से फुल फील होता है। एक पूरे देश भरके उद्योजक से और दूसरा आखाती देशों से निर्यात होने के अवसर पर। 
सोलापुर से उत्पादित होने वाले टेरी टॉवल्स देश-विदेश में अच्छी डिमांड है। फिलहाल टेरी टॉवल्स का उद्योग 12 सौ करोड़ रुपए का है। यहां के उत्पादित टेरी टॉवल्स की खासियत यह है कि वह टर्कीशटॉवेल को भी टक्कर देता है। 
सोलापुर में 25 से 27 सितंबर को `ग्लोबल टेरी टॉवल्स एक्सपो एंड समिट` का आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया था। उस वक्त 20 राष्ट्रों से 200 से अधिक प्रतिनिधि और देश भर के 3000 प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस भव्य आयोजन से टैक्सटाइल डेवलपमेंट फाउंडेशन के सीईओ राजेश गोसकी तथा वाइस चेयरमैन उद्योजक गोविंद झंवर और उनके सभी टेक्सटाइल उद्योजक के मालिकोने आने वाले 5 वर्ष़ों में इस उद्योग द्वारा 4000 करोड़ का टर्नओवर का लक्ष्य केंद्रित किया था। मगर मंदी के अवस्था और अभी का कोरोनावायरस से व्यापारी आर्थिक स्थिति से कमजोर हो गया है। 
सोलापुर में 250 जीएसएम से लेकर 750 जीएसएम की क्षमता होने वाले टर्कीश टॉवेल बनाने वाले कारखाने हैं।इसके अलावा जीरो ट्विस्ट टॉवल भी सोलापुर के उत्पादकोने बाजार में पेश किए हुए हैं। सोलापुर के टेरी टॉवल का बिजनेस स्थानीय बाजार में 50% है और 50% उत्पादनो को निर्यात से होता है। 
सोलापुर टेक्सटाइल एवं यंत्रमाग क्षेत्र पूर्णता पूरी क्षमता से शुरू नहीं हुआ है क्योंकि उत्पादक माल को पूरा उठाव ही नहीं है।सिर्फ कामगारों को रोजी-रोटी उपलब्ध करने के इरादे से कारखाने शुरू किए गए हैं।इस क्षेत्र के करीबन 20 से 25000 कामगार बेरोजगारी से गुजर रहे हैं। निर्यात क्षेत्र भी पूर्णता शुरू नहीं हुआ है।आखाती देश यूरोप और यूएसए देश में से 50% उत्पादन क्षेत्र के वस्त्र की डिमांड है। इस वजह से निर्यात करने वाले कारखानदार वर्ग ने प्रोडक्शन शुरू किया है। 
बहुत से कारखानदारोने स्वस्थ एवं कम दर्ज वाले यान पर चलने वाले चीनी लूम्स द्वारा उत्पादन कर रहे थे। परंतु अब चीनी लूम बार-बार ब्रेकडाउन होने की वजह से कारखानदार परेशानी में है।चीनी लूम रिपेयर भी जल्दी से नहीं होते हैं। 
इस करोना संकट से उद्योजक पहले ही आर्थिक संकट में थे। केंद्र सरकार के टेक्सटाइल विभाग के कैबिनेट मंत्रालय द्वारा उन्हें कुछ तरह से कुछ तो राहत मिलेगी इस प्रतीक्षा में टेक्सटाइल उद्योजक है। 

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