कोरोना कहर : थोक एवं रिटेल कपड़ा मार्केट में कामकाज प्रभावित

कोरोना कहर : थोक एवं रिटेल कपड़ा मार्केट में कामकाज प्रभावित
हमारे संवाददाता   
स्थानीय थोक कपड़ा मंडी म.तु.में शादी-ब्याह एवं अन्य मांगलीक कार्यक्रमों की छुटपुट ग्राहकी छोटे शहरों और गांव की ऑनलाइन रही। दबाव वाली ग्राहकी ऑनलाइन में भी कमी बताई जा रही है। व्यापार जगत दबाव वाली ग्राहकी नहीं होने से जूझ रहा है। इसी बीच इंदौर की फिजा में कारोना वायरस से सोशियल डिस्टेंस का सावधानी बरतने से प्रभावितों का संक्रमण का प्रकोप कम हो रहा होने से व्यापार की संभावना बढ़ती प्रतीत हो रही है। जोरदार ग्राहकी की तीव्रता कब होगी यह तो भविष्य कोविड के भय से जैसे-जैसे वातावरण मुक्त होगा तब ही हो सकेगी। व्यापारियों के अनुसार ग्राहकी के कुछ दिन ही बचे है आगे मल मास शुरू हो जाएंगे। अब आगामी पूरे तीन-चार माह तक ग्राहकी का वातावरण कमजोर बना रहेगा। अर्थात अब दीवाली ग्रहकी ही निकल सकेगी और वह भी कोविड भय से कितनी होगी यह नहीं कहा जा सकता है। अर्थात व्यापारियों की नजरों में वर्ष 2020 उनके लिये हानिकारक रहा है। अभी व्यापार में दबाव वाली ग्राहकी के विषय में व्यापार जगत कहने को शांत है। मंडी व्यापारियों के अनुसार कपड़े और वस्त्रों में हर वर्ष यह समय भारी प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण का रहता था।  कई कंपनियों की कई वेराइटी अपने बैजोड़ मेकिंग और फीनिश के कारण व्यापार जगत-ग्राहकों को स्कीमों और डिस्प्ले के वातावरण बनाते थे जो अब इस वर्ष लुप्त से रहेंगे।  हालांकि  अभी ऑनलाइन छोटे शहरों और गांव की तरफ की औसत  200 गाठें की जो चालानी कटी है उसमें सिंथेटिक साड़ियां और सूटिंग-शर्टिंग कपड़े में भी सिंथेटिक की ही मांग अधिक हुई बताते है। सूटिंग-शर्टिंग, साड़ी एवं ड्रेस मटीरियल में अच्छी बुकिंग कुछ ऐजेंसी एवं डीलरों के मिल रही है। मेंस वियर में आजकल कुर्ता-पायजमा का चलन गर्मी मौसम के हिसाब से अधिक बढ़ गया है। जिसको लेकर थोक मंडी कारोबारी सूती के डिजाइनर कुर्ता-पायजामा का अच्छा कलेक्शन कर रखे है। ग्रामीण ग्राहकी भी कुर्ता-पायजामे की अधिक हुई बताई जा रही है। अभी प्रदेश के बाहरी प्रदशों में जैसे तामिलनाड तरफ और आंध्रप्रदेश तरफ की पुरानी डिमांड सतत् जारी है और वह भी अब आगे गर्मी का सीजन रहने से कुछ रेडीमेड गार्म़ेंट  है। अलावा सूती मोटे धागे की बेडशीट्स में मल्टी कलर, प्रींटेड, ब्लीच के अलावा ग्रे में मांग की निकलने की आशा है।  
ग्रामीण इलाकों के अलावा शहरी मध्यमवर्गी परिवारों की पसंद भीलवाड़ा की सुजुकी में रही है अन्य कंपनियों की क्वालिटी के बनिस्बत भीलवाड़ा तरफ का सिंथेटिक सूंटिग का माल सस्ता होने से भारी पूछपरख एवं खरीदी में रहा। कुछ कंपनियों के नये रिंकल फ्री सूटिंग-शंिर्टंग के उत्पादों को भी मांग मिली है। वस्त्र में भी स्थानीय वस्त्रों निर्माताओं को इस वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कोविड पीरियड में कठयों के कांट्रेक्ट हाथ से गये तो इंवेंट्री में लगा पैसा भी पानी हो गया। आगे कैसे फैशन रहेगे क्या ग्राहकी आलम रहेगा यह सोचकर ही उन्हें मूल और ब्याज का नुकसान याद आता है।   
अभी वर्तमान बारिश मौसम में साडियों में सूरत की इटालियन एवं माईक्रो शिफॉन की भी मांग हो रही है। साड़ी व्यापारियों के अनुसार आगामी ग्राहकी जब भी दबाव वाली बनेगी तब धारण प्रिमियम डिजाइन की साड़ियों की पूछपरख वैवाहिक कार्यक्रमों हेतु लगातार मांग में बने रहने की संभावना है। निमाड तरफ सूरत की लेजर सिंथेटिक प्रिंटेड साड़ियां जिन पर लाइन वर्क और वेल्यूएडेड आयटम से सजाई गई साड़ियों की रहती है वह भी बनी रहेगी। निमाड तरफ कृषकों का उनकी फसल का उचित धन इस वर्ष समय पर मिल गया होने से पुरानी उधारी भी चुकता कर रहे है तथा इस बार कृषकीय ग्राहकी का भारी उमड़ाव आगे रहने की भरपूर संभावना है। वैवाहिक कार्यक्रमों हेतु विशेष भारी लहंगा-चुन्नी, फैंसी साड़ियों की मांग अधिकतर  कलकत्ता, जयपुर-जोधपुर तरफ की अलावा बनारस तथा दक्षिण भारत की आर्ट सिल्क साड़ियों की विशेष डिजाइन से सज्जित कड़ाई की हुई साड़ियों की मांग को मंडी व्यापारियों ने बताया है। उनके अनुसार उच्च वर्ग की महिलाएं दाणी-शिफॉन, जार्जट एवं इटालियन तथा आर्ट सिल्क साड़ियों पर आगे निकल सकती है। बलोतरा तरफ का पापलीन और रूबिया मे थोक के साथ ही खेरची तरफ ग्राहकी चल रही है।

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