चीन के कंबल का पानीपत के मिंक कंबल ने किया सफाया

जालंधर, अमृतसर व लुधियाना के मिंक कंबल भी दे रहे झटका 
हमारे संवाददाता
पानीपत । प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को देश के कंबल उद्योग पहले से अपना रहा है।जिसके तहत कुछ वर्ष पूर्व कंबल व्यापार में वर्चस्व स्थापित कर लेने वाले चीन को पानीपत के व्यापारियों ने जोर का झटका दिया है।वहीं अब कोरोना महामारी और सीममा विवाद से उत्पन्न तनाव के बाद दुनियाभर में बने चीन के सामान का खिलाफत हो रहा है।जिसको लेकर भारतीय कारोबारियों की दुनियाभर में पांच पसारने की तैयारी में है।
दरअसल देश में मिंक कंबल का सबसे अधिक उत्पादन हरियाणा के पानीपत में होता है।जिसके बाद पंजाब के जालंघर,अमृतसर व लुधियाना में मिंक कंबल की इकइयां हø।चूंकि चीन से भी कम कीमत पर बेहतर गुणवत्तायुक्त कंबल बनाने वाले पानीपत के उद्यमियों ने विश्व भर में अपनी धाक जमाई है।जिसके तहत पिछले एक दशक में मिंक कंबल की 45 इकाइयें लगाने वाले पानीपत में इस वर्ष 25 और मिंक कंबल की इकाइयों की शुरुआत होने वाली है।जिसको लेकर पानीपत कें मिंक कंबल के उद्यमियों की तरफ से कहा जा रहा है कि दक्षिण अमेरिका में मिंक कंबल के लिए तीन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा थी।जिनमें दो चीन की व एक पानीपत की थी।जिसके तहत पानीपत के मिंक कंबल के कारोबारियों को ऑर्डर मिला क्योंकि गुणवत्ता बेहतर थी और चीन की तुलना में कीमत अपेक्षाकृत कम थी।जिसके तहत जो कंबल पांच हजार रुपए तक मिलता था जिसकी कीमत अब एक हजार रुपए (170 रुपए किलो) तक रह गई है।वहीं चीन में इस कंबल को बनाने के लिए तीन से चार इकाइयों से होकर गुजरना पड़ता है।हालांकि पानीपत की एक ही इकाई में मिंक कंबल के उत्पादन से लेकर विपणन तक होती है।ऐसे में चीन की मशीनों से ही चीन को मात दी जा रही है।वहीं पंजाब के जालंधर,अमृतसर व लुधियाना में मिंक कंबल तैयार करने की इकइायां है।जिसको लेकर पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्यारा लाल सेठ ने कहा कि पंजाब में कंबल उद्योग का कारोबार 2300 करोड़ रुपए का है।जिसके तहत सबसे अधिक योगदान डेढ हजार करोड़ रुपए का जालंधर में निर्मित होने वाले कंबल का है।वहीं लुधियाना में पांच सौ करोड़ रुपए और अमृतसर में तीन सौ करोड़ रुपए के कंबल का कारोबार होता है। हालांकि पहले लुधियाना कंबल उद्योग्र का बड़ा केद्र हुआ करता था बहरहाल कई उद्यमियों ने विस्तार के लिए पानीपत का चुना है।जिसको लेकर लािधियाना फैब्रिक्स एसोसिएशन के महासचिव बॉबी जिन्दल ने कहा कि लुधियाना में अधिकतर उद्यमी मिंक एवं पोलर फ्लीस के बंबल बनाते हø।वहीं रोटर्स स्पीनिंग मिल एसोसिएशसन के अध्यक्ष प्रीतम सचदेवा ने कहा कि हम किसी समय में चीन से सौ प्रतिशत कंबल आयात करते थे बहरहाल आज 95 प्रतिशत पानीपत में कंबल बना रहे हø।ऐसे में शेष पांच प्रतिशत बाजार जो चीन के पास है जिसको भी शीघ्र समाप्त कर देंगे।इस समय फ्लैनन कंबल चीन से आ रहा है जिसकी भी इकाई पानीपत में लग रही है।ऐसे में घरेलू बाजार में ही नहीं अपितु विदेशी बाजार में भी पानीपत का कंबल का डंका बजाने को लेकर उत्सुक हø।उन्होंने कहा कि मिंक कंबल पहले ऊपर से भूरे और नीचे से सफेद रंग में आता था।वहीं मिंक यानी ऊदबिलाव के जैसे मिंक कंबल मुलायम हो होता है।उल्लेखनीय है कि मिंक कंबल बनाने के लिए पानीपत में रोजाना बहार से 1500 टन धागा आता है।जिसके तहत इस समय मिंक कंबल का छह हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता हे जो कि आगामी माह में दस हजार करोड़ रुपए का वार्षिक कारोबार होने की उम्मीद है।

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