सोना की कीमत नई ऊंचाई पर पहुंचने की संभावना

सोना की कीमत नई ऊंचाई पर पहुंचने की संभावना
सोने में देशी-विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी
रमाकांत चौधरी
नई दिल्ली । घरेलू सहित वैश्विक स्तर पर कोरोना के बढते प्रकोप के चलते देश-विदेश के निवेशकों की सोने के निवेश में दिलचस्पी बढ रखी है।ऐसे में सोने की कीमत पहली बार 50 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई।ऐसे में  घरेलू व वैश्विक निवेशकें की सक्रियता बढने से इस वर्ष सोना नई ऊंचाई को छू सकता है।
दरअसल कोरोना महामारी के बढते प्रकोप के चलते देश-विदेश के निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रुप में सोने में दिलचस्पी बढ रखी है।ऐसे में दिल्ली में पहली बार 9 जुलाई 2020 को सोना 50,184 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया।वहीं चालू माह के शुरु में भारतीय वायदा बाजार मल्टी कमोडिटीज एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 48,992 रुपए प्रति 10 ग्राम तक उछला था जो कि अब तक का एक स्तर है।वहीं घरेलू हाजिर बाजार में सोने का भाव 50,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकार्ड तोड़ चुका है।वहीं विश्व बाजार में सोने का भाव 1200 डॉलर प्रति आस तक जाने के आसार ह।वहीं चालू माह के शुरु में विश्व बाजार में सोना 1807.70 डॉलर प्रति औंस तक उछल गया था जो कि 21 सितम्बर 2011 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।उस अवधि में सोने का भाव 1812 डॉलर प्रति आस था।वहीं कॉमेक्स पर सोने का भाव छह सितम्बर 2011 को रिकार्ड स्तर 1911.60 डॉलर प्रति आस तक उछला था।जिसको लेकर दिल्ली बुलियन  एक बड़ा माध्यम बनने जा रहा है। ये श्योर, प्योर और सिक्योर है। श्योर इसलिए कि सूर्य हमेशा चमकता रहेगा, जब सभी संसाधन खत्म हो जाएंगे। प्योर, इसलिए क्योंकि इससे पर्यावरण पूरी तरह से सुरक्षित और साफ-सुथरा बना रहेगा। सिक्योर इसलिए कि इससे बिजली की जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।रीवा में स्थापित वृहद सौर ऊर्जा संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े सिंगल साइड सौर सयंत्रों में से एक है। यह परियोजना 750 मेगावाट की है और 1590 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित है। इसमें कुल तीन इकाईयां है। प्रत्येक इकाई में 250 मेगा वाट विद्युत का उत्पादन हो रहा है। परियोजना से उत्पादित विद्युत का 76 प्रतिशत अंश प्रदेश की पावर मैनेजमेंट कंपनी और 24% दिल्ली मेट्रो को प्रदान किया जा रहा है। इसमें प्रति यूनिट की क्रय दर 2 रूपये 97 पैसे है, जो अब तक की न्यूनतम दर है। सौर परियोजना को पर्यावरण की दृष्टि से देखे तो रीवा सौर परियोजना से प्रतिवर्ष 15.7 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उर्त्सजन को रोका जा रहा है जो 2 करोड़ 60 लाख पेड़ों को लगाने के बराबर है। यही नहीं, इसे प्रधानमंत्री की`अ बुक ऑफ इनोवेशनब् न्यू बिगनिंग्स' पुस्तक में भी शामिल किया गया है। इस सौर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) ने विकसित किया है जो मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (एमपीयूवीएन) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।

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