सरसों में तेजी, सोयाबीन में मंदी

सरसों में तेजी, सोयाबीन में मंदी
वैश्विक वायदा बाजार में परिस्थितियों से खाद्यतेलों में उतार-चढ़ाव
हमारे संवाददाता
 इंदौर । भारतीय भूमि पर इस वर्ष प्रकृती की कही अधिक मेहरबानी तो कही सूखा जा रहा है । मालवा का इलाका गत् हप्ता बरसात को तरसता रहा । सुबह सुबह बादल , घटांऐं दिखती लेकिन जैसे जैसे दिन का समय बीतता घटाओं से सूर्यदेव अपने पूरे वेग से उभर आते । इस प्रकार घटाओं और सूर्य की लुका-छुपी  दिनभर होती रहती है । गत् हप्ते हांलाकि छुट-पुट बरसात हुई इससे कृषि को कोई लाभ होता प्रतीत नही हुआ । इधर का कृषक चिंता में रहा । चालू हप्तें में यदि बरसात हो गई तो फसल सम्हल जाऐगी अन्यथा शंका बिगडने की रहेगी । गत् हप्ता हल्की धूप तो कभी तेज रही । गर्मी का पूरा अहसास रहा ।  क्रुड के  भाव तो गिर रहे है मगर खाद्य तेलो पर भारत में तेजी जारी रही है । वैश्विक खाद्य तेल भाव चाईना और मलेशिया के राजनैतिक सरगर्मी के कारण सटटे् में भी नही उठ पा रहे थे अचानक ही उसमें तेजी आ गई हे । जिससे भारतीया खाद्य तेल भावो में आग सी लग गई है  । विदेशी वायदा बाजारो  में गत् हप्ते बुधवार को केएलसीई  9 मायनस खुली थी तथा शिकगो सोया तेल वायदा भी मंदी में बताया जा रहा था । हांलाकि भारतीय बाजार में मंगलवार से लगातार तेजी बताई जा रही थी । मुंगफली तेल और सोया तेल भाव क्रमश: 1300 से 850 रू का हाजिर में भाव था । मुंबई पाम तेल का भाव 818 रू तक होना बताया जा रहा था । दूसरी तरफ सोयाबीन सटटे में 3650 -3700 रू टूटता जा रहा था ।  विदेशो में सोयाखली की कमजोर मांग और निर्यात के कारण सोयाबीन के भाव उठ नही पाये बताऐ जा रहे है ।  अगली फसल आने के पूर्व सौदागरो की चालो में उलझा रहा बताया जा रहा था । सोयातेल की कई रिफाईनरिया बंदी के कगार पर बताई जा रही है । सोया तेल उत्पादन गिर रहा है या गिराया जा रहा है उसके पीछे क्या सोयाबीन की अगली फसल का चक्र हे या आयातित सस्ते पाम तेल तेल की भरमार का है ।  जनता विश्ल्थाषको की सुने तो सीधे एक ही प्रश्न उभरता है कि क्या आयाति पाम तेल स्वास्थ की दृष्टि से उपयुक्त है ? इसकी पौष्टिकता की विवेचना हमारे तेल विशेषज्ञ और स्वास्थ से जुउथ डॉक्टर्स नही कर रहे हे जैसे कि सोयातेल पर करते थे । व्यापारिक क्षैत्रों की सुने ता लांटो का अन्य प्लांटो से प्रतिस्पर्धा तुलनात्मकता भाव और वायदा सटटे् के भावो में बेचवाल ाड्ड बनी रहती है ।  इससे भी भाव बढते अधिक है घटते कम है ।  उधर सरसों रायडा की पैदावार का कम होने की हवा से सरसो और तेल के भाव पर गत् हप्त तेज बने रहे ।  4200-4300 रू से सरसों का भाव उठकर 5000 रू के उपर तक होना बताया जा रहा था ।  इससे भी अन्य तेल के भावो को उपर की गति मिली बताते है । इंदौर की  मंडियो में सोयाबीन की आवके भी 1500 से 2000 हजार बोरी कमजोर होना बताई जा रही है ।  उधर तेल कारोबारियो का कहना है कि आगे कोविड का माहोल कैसा रहता है और बाजार की चाल कैसी रहती है उस पर तेलो की खपत पर ही आगे के भाव मंदी या तेजी के उबर कर आगे आ पायेंगे । उनके अनुसार वर्तमान की तेजी भी लॉकडाउन में नही अधिक खपत हुऐ स्टॉक को निकालने की तेजी है ।  सोया तेल की हालत के समर्थन में सरसों  और मूंगफली तेलो में भी  उंचे भाव पर मांग नही होने के बावजूद  भाव बढ  रहे है । इस वर्ष भी पाम तेल का आयात  में कमी नही है और  स्टॉक को देखते हुए  इस वर्ष आपूर्ति में कमी नही आएगी ।  वर्तमान उंचे भाव पर अधिक बढते भाव पर सरकार को महंगाई कंटोल करने की कवायद पर अधिक ध्यान जनता हित में रखना होगा है ।  सरकार की  नई कार्यप्रणाली क्षि को बढावा देने  हेतु बनी है । इससे  संभावना अधिक पैदावार की भी बनती है । मगर क्या भाव अंकुशित रहेंगे ? गरीब किसानो की आड में संपन्न और मालामाल किसान, वे सरकारी  सहूलित का पूरा फायदा उठाते रहे है। उंचे  किसान जो गांव के साहूकार श्रेणी के है  गरीब किसानो को कर्ज  में लताडते  रहे है ।  माफिया किसानी  जमीने छीनने और आत्महत्या को मजबूर कर उनकी भी आड लेकर फायदा कूटते रहे है । 

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