कॉटन सीड केक के भाव और दबाव में रहने की संभावना

मुंबई। कॉटन सीड ऑयल केक की कीमतें लगातार नीचे आ रही है एवं अभी इसके थमने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। कॉटन सीड ऑयल केक के भाव लगातार टूटने की वजह देश में अच्छी बारिश से घासचारे की बढ़ी उपलब्धता,अन्य वैकल्पिक पशु आहार का सस्ता होना एवं मौजूदा खल की क्वॉलिटी घटिया होना है।'
'देश व्यापी लॉकडाउन की वजह से दूध की खपत और भाव में भी गिरावट आई है जिसकी वजह से अब पशुपालक पशुओं को कॉटन सीड ऑयल केक खिलाने से बच रहे हैं क्योंकि इसके दाम अन्य पशु आहार की तुलना में अधिक है। पशुओं में दूध में फैट बढ़ाने के लिए कॉटन सीड ऑयल केक का उपयोग किया जाता है। लेकिन अब मक्का,गेहूं का भूसा,चना चूरी जैसे वैकल्पिक पशु आहार जो पिछले साल इन दिनों 20 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक रहे थे,अब 12-13 रुपए प्रति किलोग्राम आ गए हैं। इसके अलावा इस साल मानसून समय पर आने से घास चारे की कमी नहीं है जिससे पशुओं को हरा चारा अधिक डाला जा रहा है।'
आम तौर पर कॉटन सीड ऑयल केक में अप्रैल में मंदी आती है एवं अगस्त में इसके दाम बढ़े हुए होते हैं लेकिन इस बार स्थिति उल्टी दिखाई दे रही है। हालांकि,नई कॉटन सीड ऑयल केक अक्टूबर में आएगी लेकिन इस साल अन्य वैकल्पिक पशु आहार प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है जिसकी वजह से अन्य पशु आहार का उपयोग बढ़ा है।'
'गुजरात कॉटन सीडस क्रशर्स एसोसिएशन,कडी (गुजरात) के अध्यक्ष प्रहलाद पटेल का कहना है कि कॉटन सीड ऑयल केक में तेजी की गुंजाइश दिखाई नहीं देती। कड़ी में कॉटन सीड ऑयल केक 1200-1230 रुपए प्रति 60 किलोग्राम बिक रही है जिसके नया सीजन शुरु होने से पहले 1100 रुपए प्रति 60 किलोग्राम तक आ जाने की संभावना है। वे कहते हैं कि इस समय क्वॉलिटी वाली केक की कमी है और सीसीआई के पास जो कॉटन सीड है उसका खल बेहद घटिया क्वॉलिटी का ही बन सकता है। कड़ी बाजार में दिवाली से पहले नया खल आने की उम्मीद है। वे कहते हैं कि इस साल बारिश समय पर आने से घास चारे की कमी नहीं है,जिसकी वजह से खल की ग्राहकी प्रभावित हुई है। आल इंडिया कॉटन सीड क्रशर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश सेजपाल का कहना है कि गुजरात खासकर कड़ी में कॉटन सीड ऑयल केक का स्टॉक चार लाख बोरी (प्रति बोरी 60 किलोग्राम) है जबकि यह स्टॉक अमूमन 15 लाख बोरी होता है।

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