मिर्च की वैश्विक मांग बढ़ी

मिर्च की वैश्विक मांग बढ़ी
कोच्चि। इंडोनेशिया में काली मिर्च की तुड़ाई शुरु होने के साथ मिर्च की वैश्विक मांग में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इंडोनेशिया में काली मिर्च के उत्पादन को लेकर बड़ा भ्रम बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय खरीददार जहां उत्पादन अनुमान 50 हजार टन जता रहे हैं वहीं इंडोनेशियाई निर्यातक इसे 20 हजार टन से कम आंक रहे हैं। 
जबकि, मजे की बात यह है कि इंटरनेशनल पीपर कम्युनिटी का मुख्यालय जकार्ता में है लेकिन उसके लिए वास्तविक उतपादन, निर्यात और घरेलू खपत की आंकडे देना कठिन हो गया है। इंडोनेशिया के बाद ब्राजील में काली मिर्च की तुड़ाई होगी। अंतरराष्ट्रीय खरीददार मानते हैं कि काली मिर्च के दाम आने वाले महीनों में स्थिर रहेंगे क्योंकि ब्राजील के बाद भारत में काली मिर्च की तुड़ाई होगी एवं इसके बाद वियतनाम का नंबर है। 
दूसरी ओर, काली मिर्च के दाम नीचे होने से भारत में भी इसकी खपत बढ़ रही है। भारत में इसकी औद्योगिक मांग में इजाफा हो रहा है एवं घरेलू खपत हर महीने तकरीबन पांच हजार टन है। दुनिया में काली मिर्च की बड़ी खपत अमरीका, चीन एवं भारत में है। काली मिर्च की मांग बढ़ने से घरेलू प्रोसेसर्स फार्म ग्रेड पीपर की खरीद के साथ श्रीलंका से भी आयात बढ़ा रहे हैं। भारतीय मसाला कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी टेकओवर करने में लगे हैं जो इस इंडस्ट्री के लिए सुखद खबर है, इससे भारत से मसाला कारोबार में बढ़ोतरी होगी। कोच्चि बाजार में काली मिर्च अनगार्ब्लड का भाव 319 रुपए प्रति किलोग्राम रहा ।

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