कामकाजो के चलने की संभावना बढ़ी

हमारे संवाददाता
आलोच्य सप्ताह मे धागे के बढें भावो मे सूत मंडियो मे उत्साहजनक काम नही हो रहा है। मिलो को बढे भावो मे काम नही निकलने से धागा बैंचने मे परेशानी आ रही है। श्राद्ध पख खत्म होने के साथ ही बाजारो मे कारोबारियो को बाजारो मे कामकाजो के निकलने की पूरी आषा है। बाजारो मे चादरो को छोडकर के दूसरे कपडे की आईटम मे बहुत बढिया बिक्री नही निकलने से दुकानदारो का मनोबल काफी टूटा हुआ है। बाजारो मे धन का प्रवाह बहुत कम होने से बाजारो मे धन की तंगी महसूस की जा रही है। 
 व्यापारिक सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार हरियाण की पानीपत , दिल्ली , उत्तर प्रदेष कीसरधना , मेरठ पिलक्षावा , मुरादनगर आदि मंडिया मे धागें की खपत जिस हिसाब से होनी चाहिये थी उतनी नही होने से हरियाणा, पंजाब,राजस्थान , मध्यप्रदेष व दक्षिण भारत की मिलो के सामने तैयार धागे को बेचने का सकंट बना हुआ है। दिल्ली के प्रमुख सूत कारोबारी मोहन लाल गुप्ता का कहना है कि सूत मे हल्की घटबढ के साथ ही पूरे वर्श तक ऐसे ही कामकाजो के चलने की सम्भावना है।  
दिल्ली मे आजाद मार्किट मे कपडे के थोक कारोबारी रविद्र सिंघल का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते ही कैनवास मे बैग का काम करने वाले पूरे वर्श ही बिक्री का संकट बने रहने की सम्भावना है। नये वर्श मे जरूर कामकाजो के चलने की सम्भावना है। देश के अंदर संचालित स्कलो के बंद होने तथा देष विदेष मे यात्राये स्थगित होने तथा धेर धीरे यात्राये आरम्भ होने से इस बैंग उधोग को एक बडा झटका लगा है।  
चादर का कारोबार करने वाले चादर के थोक उत्पादक व सप्लायर सुनील  मित्तल का कहना है कि दिसावर की मंडियो से कामकाज तो निकल रहे है जितने निकलने चाहिये थे उतने तो नही नही निकल रहे है। चादर व्यापरी सस्ती चादर बनाने के कारण ही पूरे देश मे अपने चादरो की सप्लाई को करने  मे कामकयाब हो रहे है।  
लिहाफ का काम करने वाले अजय टाँक बताते है कि आगामी सीजन को ध्यान  मे रखकर के रजाई तैयार की जा रही है। लेकिन बिक्री केसी निकलेगी इसको लेकर के संष्य बना हुआ है। अगर बिक्री अच्छी निकल जाती है तो काराबारियो को मनोबल भी बढ जायेगा वैसे तो कारोबारी पिछले स्टाक को ध्यान  मे रख्कर के ही साच समझकर के माल को तैयार कर रहे है।  
कोराबारियो का कहना है कि बाजारो मे धन की तंगी के चलते ही अब कोई भी कारोबारी उधार मे माल को बैंचेने को इच्छुक नही है। ज्यादातर कारोबारी काम कम हो पर अब नकद मे ही बैचने मे इच्छुक है। कारोबारियो ने कोरोना संकमणकाल मे फसी एधारी के न आने से ऐसा करने के लिये व्यापरी मजबूर हो रहं है।  

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