25 सितम्बर को पंजाब बंद

हमारे प्रतिनिधि  
नई दिल्ली । केद्र सरकार की तरफ से संसद के मानसून सत्र में तीन कृषि विधेयक प्रस्तुत कर दिए गए हø।जिसको लेकर पंजाब के किसान भारी विरोध कर रहे हø।ऐसे में देश भर के किसानों में विरोध के स्वर उभरने लगे हø।जिसको लेकर किसान संगठनों ने 25 सितम्बर 2020 को पंजाब बंद का एलान किया है।इसके साथ ही किसान संगठनों की तरफ से 24 से 26 सितम्बर 2020 तक रेल का चक्का जाम करेंगे।इसीबीच कृषि विधेयक के विरोध में केद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौल बादल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।जिसके बाद पंजाब में कृषि विधेयक के खिलाफ आंदोलन और तेज हो गया है।वहीं देखादेखी में पंजाब में फतेहपुर साहेब के विधायक कुलजीत नागरा ने भी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है।जिससे कृषि विधेयक के खिलाफ आंदोलन भड़कने लगा है। 
दरअसल केद्र सरकार के कृषि विधेयक के खिलाफ पंजाब के किसानों का आक्राश थम नहीं रहा है।जिसके तहत किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब ने 24 सितम्बर 26 सितम्बर 2020 तक 48 घंटों के लिए राज्य भर में रेल रोकने का फैसला किया है।जिसके तहत देश के 250 किसान मजदूर जत्थेबंदियों पर आधारित तालमेल संघर्ष कमेटी के आह्वान पर 25 सितम्बर को पंजाब बंद की कॉल की गई है।जिसको लेकर पंजाब के किसानों ने कहा है कि बाजार भी खोलने नहीं दिए जाएंगे।जिसको लेकर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि हमने 24 से 26 सितम्बर तक पंजाब में रेल रोको आंदोलन चलाने का फैसला किया है।जिसके तहत किसान व खेतिहर मजदूर विरोधी कृषि विधेयकों के खिलाफ पंजाब में ट्रेनों का चक्का जाम किया जाएगा।वहीं किसानों ने 17 सितम्बर को पटियाला में पावरकॉम कार्यालय के बाहर धरना दिया।वहीं किसानों ने माल रोड पर एक घंटे तक जाम लगाया।वहीं पंजाब के अमृतसर में किसानों ने ऐलान किया है कि जेल भरो आंदोलन राज्य भर में डीसी कार्यालय के बाहर चल ही रहा है।यह आंदोलन पहली अक्टूबर तक जारी रहेगा।किसानों ने मांग की है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।वहीं शांताकुमार कमेटी के प्रस्तावों को रद्द किया जाए।इसीबीच एक तरफ केद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि वही केद्र सरकार के समक्ष कई बार यह मामला उठा चुकी है कि कृषि विधेयक को पारित कराने से पहले किसानों को विश्वास में लिया जाए।जिसको लेकर विश्वास था कि इस विधेयक को पारित करते समय उनकी आशंकाओं का समाधान किया जाएगा।बहरहाल ऐसा नहीं किया गया।वही दूसरी तरफ पंजाब के फतेहगढ साहेब से कांग्रेस विधायक कुलजीत नागरा के कृषि विधेयक के विरोध में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है।जिसको लेकर उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि किसानों के साथ केद्र सरकार इस तरह का व्यवहार कर ही हो और हम चुप बैठे रहें।मेरी आत्मा इस बात की इजाजत नहीं दे रही है इसलिए मøने किसान के समर्थन में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है।
 तीन कृषि विधेयक का मूल सार 
कृषि से संबंधित तीन कृषि विधेयक संसद से पास होने हø।जिसमें प्रथम बिल कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक में किसान फसल उपज कही भी बगेच सकेंगे।किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।वहीं ऑनलाइन बिक्री भी होगी।द्वितीय बिल मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता में किसानों की आय बढेगी।बिचौलिए समाप्त होंगे।आपूर्ति चेन तैयार होगी।वहीं तृतीय बिल आवश्यक वस्तु (संशोधन) में अनाज,दलहन,तिलहन,खाद्य तेल,आलू,प्याज अनिवार्य वस्तु नहीं रहेंगे।इनक।ा भंडारण होगा।कृषि में विदेशी निवेश आकर्षित होगा।
तीन कृषि विधेयक के खिलाफत के तथ्य 
कृषि से संबंधित तीन कृषि विधेयक का खिलाफत हो रहा है।जिसको लेकर कृषि विधेयक के प्रथम बिल को इसलिए लिलाफत किया कहा जा रहा है कि मंडियां समाप्त हो गई तो किसानों को एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।वन नेशन वन एमएसपी होना चाहिए।वहीं कृषि विधेयक के दूसरे बिल को इसलिए खिलाफत किया जा रहा है कि कीमतें तय करने की कोई प्रणाली नहीं है।डर है कि इससे निजी कंपनियों को किसानों के शोषण का जरिया मिल जाएगा।किसान मजदूर बन जाएगा।वहीं कृषि विषेयक z तीसरे बिल को इसलिए खिलाफत किया जा रहा है कि कारोबारी जमाखोरी करेंगे।इससे कीमतों में अस्थिरता आएगी।खाद्य सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।इससे आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी बढ सकती है।   

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