चीनी मिलों को नहीं मिली केद्र से अनुदानों की धनराशि

चीनी मिलों को नहीं मिली केद्र से अनुदानों की धनराशि
नगदी संकट से जूझ रहा चीनी उद्योग
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । देश भर के चीनी उद्योग के अग्रणी संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने कहा कि केद्र सरकार की तरफ से चीनी निर्यात अनुदान और बफर अनुदान का भुगतान नहीं होने से चीनी मिलें नगदी संकट से जूझ रही है।
इस्मा के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा कि चीनी निर्यात अनुदान और बफर अनुदान सहित अन्य अनुदान के तौर पर केद्र सरकार पर 8,000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम चीनी मिलों को भुगतान करना है।बहरहाल इसको लेकर कोई बजटीय आवंटन नहीं किया गया है।उन्होंने कहा कि केद्र सरकार की तरफ से भुगतान नहीं होने से चीनी उद्योग नकदी संकट से जूझ रहा है।जिससे किसानों के बकाये का भुगतान नहीं हो पा रहा है।उल्लेखनीय है कि भारत के चालू चीनी र्मासम 2019-20 (अक्टूबर-सितम्बर)में चीनी का रिकॉर्ड निर्यात किया है बहरहाल गन्ना किसानों का बकाया अभी भी चीनी मिलों पर 15,000 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है।उन्होंने गन्ना किसानों के बकाये भुगतान नहीं होने को लेकर कहा कि हमने घरेलू चीनी की कीमत से लगभग 10 रुपए प्रति किलो घाटे पर चीनी निर्यात किया।जिसके तहत चीनी का निर्यात लगभग 202-21 रुपए प्रति किलो पर हुआ।वहीं घरेलू बाजार में चीनी का दाम लगभग 31-32 रुपए किलो का था।केद्र सरकार निर्यात अनुदान से इस घाटे की भरपाई करती है।बहरहाल निर्यात अनुदान,बफर स्टॉक अनुदान और साफ्ट लोन अनुदान के तौर पर हमें केद्र सरकार से 8,000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम मिलनी है।बहरहाल केद्र सरकार ने इसके लिए कोई बजटीय आवंटन ही नहीं किया है।जिसके चलते केद्रीय खाद्य मंत्रालय इस बकाये का भुगतान करने में सक्षम नहीं है।उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों के पास भी बिजली के बकाये के लगभग 1,500 करोड़ रुपए है जिसका भुगतान नहीं हो रहा है।उन्होंने कहा कि लगभग 35,000 करोड़ रुपए की चीनी इंवेंटरी में फंस रखी है।जिसके चलते चीनी मिलों के पास नगदी का संकट है।उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत में लगभग 108-110 लाख टन चीनी का स्टॉक रहेगा।जिसका मूल्य बाजार भाव पर लगभग 35,000 करोड़ रुपए होगा।उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के पास नगदी का इनफ्लो और आउटफ्लो में मिसमैच के चलते नकदी का संकट है।उन्होंने कहा कि 2019-20 को लेकर गन्ने का जो उचित लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 275 रुपए प्रति क्विंटल है जिस पर चीनी का उत्पादन मूल्य लगभग 39 रुपए प्रति किलो बैठता है।वहीं चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 31 रुपए प्रति किलो है।उन्होंने कहा कि इस अंतर से भी चीनी मिलों को घाटा होता है।उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने भी कहा था कि चीनी का एमएसपी 33 रुपए प्रति किलो होना चाहिए।वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि चीनी का एमएसपी 34 रुपए प्रति किलो होना चाहिए।वहीं महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि चीनी का एमएसपी 35-36 प्रति किलो होना चाहिए।वहीं कर्नाटक सरकार ने कहा कि चीनी का एमएसपी 35 रुपए प्रति किलो होना चाहिए।जिसके बावजूद अब तक चीनी के एमएसपी में बढोतरी नहीं की गई है।

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