खाद्यतेलों में भारी तेजी : सोया, पाम तेल के साथ ही अन्य खाद्य तेल में भी तेजी

खाद्यतेलों में भारी तेजी : सोया, पाम तेल के साथ ही अन्य खाद्य तेल में भी तेजी
हमारे संवाददाता 
इंदौर । पिछले माह आलोच्य सप्ताह में सोया तेल भाव 840-845 रू था और गत् हप्ते तक बढते हुऐ 925-930 रू तक हो गया ।  7 प्रतिशत की तेजी मात्र एक माह में हो गई  । पामतेल  830 रू था और उसका भाव 920-925 रू हो गया ।  तेल के भावो में अचानक इतनी वृद्धि होना आकार्य का विषय है । वायदा - हाजिर के खेल में खाद्य तेलो पर भाव बढना और घटने के खेल जारी । व्यापरिक क्षैत्रो से ली गई जानकारी अनुसार वैश्विक बाजार में भारी मांग निकलने से मलेशिया मो पाम तेल के भारी भाव बढने से भारतीय बाजारो में भी प्रभाव तेजी का होना बताया जा रहा है । जनता में हव है कि हाजिर भाव में भारी सटटा् मुनाफा वसूली का हो रहा है जबकि कोविड की महामारी में देशभर में राजनैतिक भ्डांरे बंद पडे है , जहां कि भारी खपत होती थी । दूसरी तरफ अभी कोरोना लोगो के मन से भय नही निकला है जिससे कि घर घर कोई खन-पान व्यवस्था त्योहारी पक्ष के रूप् में चल सके । फिर मांग किस ओर से आ रही है । कृषको के अनुसार  खाद्य तेलो की तेजी के पीछे उत्पादको की मुनाफा वसूली गताई जा रही है । ग्रामीण इलाको की जनता के पास आय के स्त्रोत नही है और वे चूजी बनकर रह रहे है ।  शहरी जनता के अनुसार मार्च - जून में लॉकडाउन पर उत्पादककर्ताओ का माल पडा रह गया था  और उन्हे नही बिके माल पर   हुऐ घाटे की भरपाई का कारण प्रतीत होता दिख रहा है  जिससे की भारी भाव कृत्रिम रूप से बढाये जा रहे है । वैश्विक वायदा बाजार मे पाम तेल पर बढ रहा सटटा् भी स्थानीय तेल भाव को सहारा दे रहा बताया जा रहा है । सोया पाम तेल की तेजी अन्य खाद्य तेलो के भाव पर भी प्रभावी हो रही है जिससे मुंगफली तेल और कपास्या तेल भाव भी उछले बताऐ जा रहें है । मुंगफली तेल भाव 1320  रू पार कर गया और कपास्या तेल भी 930 रू पार कर गया बताया गया है । सरसो तेल हजारी पार ही है ।  उनके अनुसार दूसरी तरफ सटटे् में सोयाबीन भाव को नीचे झूलाया जा रहा है  । अगली फसल आने तक व्यापार-तेल उत्पादक  जगत तिलहनो के भाव नही बढने दे रहा है । इंदौर -मालवा इलाके में गत् हप्ते बारिश का दौर रहा । जिसमे दिनभर में कोई आधा-एक इंच बरसात हर दूसरे दिन होती रही है । इससे फसलो की चिंता कृषक जगत में फैली हुई है । हांलाकि कुछ इलाको में सोयाबीन फसल में भारी बरबादी भी हुई बताते है । शहर-प्रशासन  और  प्रदेश सरकार की जांचे जारी है । व्यापार जगत के दिग्गज विश्लेषकों का मानना है कि भारत में पाम तेल भाव और सोया तेल भाव थंकोई अंतर नही रहजाने से  यहां के सोयाउद्योगो का चलना  प्रभावित हो सकता है । भारत में पामतेल का अधिकता में आयात होना ही सोया उद्योगो की रूग्नता बढाना हागा जिसमें उद्यााथगपति बाहर होते जा रहे है । कृषकीय विशेषज्ञो के अनुसार गत् वर्ष सोयाबीन का उत्पादन 95-100 लॉखटन से कम नही हुआ है और कृषकों के लिये कामधेनु बनी सोयाबीन का बोना और उत्पादन पिछले दशको के मुकाबले  बढता ही रहा है  । इससे  वर्ष भर सोयबीन रकबे में कमी नही आएगी ।   
जनता की मुखाग्र शक्ति की सुने तो उनका कहना भी उचित है कि, पिछली 20 वी सदी में  और 21 वी संदी के कुछ वषा तक भारत म वनस्पति घी डालडा मार्का का बोलबाला था । पिछले कई वर्षो से वनस्पति घी उद्यााथग बंद हा थगये है । पामतेल के चलन और भारतीय बाजार में नकली शुद्व देशी घी से पट पडा बाजार का, कही संबंध वनस्पति उद्यााथगो के बंद होने से तो नही है ? पामतेल का भारत मेंअधिक चलन और तैयार शुद्व घी जो कि बहुतायत में बाजारो में अटा ऐसेंस युक्त होना बताया जा रहा है । नकली देशी घी की उत्पादनलागत 70-100 रू किला है तो तो वनस्पती घी का बनाने का भार उत्पादक क्यो लें । यही कारण है कि डालडा ब्रांड उत्पादक फैक्ट्रियां बंद हो चुकी है । शुद्व देशी घी मार्केटमें 500 से 700 रू किलो तक बिक रहा है ।  

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