सोयाबीन का उत्पादन 11.3 फीसदी बढ़ने की संभावना

सोयाबीन का उत्पादन 11.3 फीसदी बढ़ने की संभावना
मुंबई। भारत में फसल वर्ष 2020-21 (जुलाई-जून) में सोयाबीन का उत्पादन 11.3 फीसदी बढ़ने की संभावना है। सोयाबीन का रकबा बढ़ने से कुछ इलाकों में फसल को हुए नुकसान की भरपाई हो जाएगी जिससे इसके उत्पादन में कमी वाली कोई बात नहीं है। 
जीजी पटेल एंड निखिल रिसर्च कंपनी के प्रबंध निदेशक गोविंद पटेल का कहना है कि इस साल सोयाबीन की खेती अधिक इलाके में होने से इसकी उपज बढ़ेगी। देश में इस साल सोयाबीन का रकबा 121 लाख हैक्टेयर रहा है जो पिछले साल की तुलना में सात फीसदी अधिक है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन का रकबा पिछले साल की तुलना में 6.7 फीसदी बढ़कर 58.5 लाख हैक्टेयर पहुंच गया। बता दें कि देश में पैदा होने वाले कुल तिलहन में सोयाबीन की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। सोयाबीन की अधिक पैदावार से देश में खाद्य तेलों का आयात घटेगा जो सालाना 150 लाख टन के करीब होता है। 
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी होने से इसके रकबे में इजाफा हुआ है। केंद्र सरकार ने सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3880 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है जो पिछले साल 3710 रुपए था। बोआई के समय सोयाबीन का भाव सात फीसदी बढ़कर 3880 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया था जिससे इसकी बोआई में इजाफा हुआ है। 
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक देश में चालू खरीफ सीजन में 122.475 टन सोयाबीन का उत्पादन होने का अनुमान है। खरीफ फसल वर्ष 2019-20 में यह उत्पादन 93.062 लाख टन था। सोपा का कहना है कि भारी बारिश एवं कीट हमले से मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल 10-12 फीसदी खराब होने की संभावना है।इंडियन इंस्टीटयूट फॉर सोयाबीन रिसर्च के मुताबिक भारी बारिश एवं कीट हमलों से मध्य प्रदेश में सोयाबीन 10-15 फीसदी फसल का नुकसान हुआ है। कई जगह सौ प्रतिशत नुकसान है लेकिन पूरे राज्य के औसत को ले लें तो यह 10-15 फीसदी का नुकसान है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल को 15 फीसदी नुकसान होने की संभावना है लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिमी इलाके जिनमें इंदौर, देवास, उज्जैन, धार, सिहोर, हरदा, शाजापुर, मंदसौर और नीमच में हुआ है। बता दें कि मध्य प्रदेश में देश में कुल पैदा होने वाली सोयाबीन में 50 फीसदी हिस्सेदारी होती है। राज्य में सोयाबीन की बोआई जून में पूरी हो गई थी एवं इसके बाद लंबे समय तक मौसम सूखा रहा एवं 20 अगस्त क तापमान सामान्य से अधिक रहा। अधिक तापमान एवं नमी की वजह से फसल पर कीट हमला हुआ। कुछ खेतों में पेस्टीसाइडस का छिड़काव भी किया गया लेकिन 15 जून से पहले जल्दी पकने वाली वैरायटी की बोआई होने से इसमें खासा नुकसान हुआ। महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में तकरीबन एक लाख हैक्टेयर में भारी बारिश से सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है। हालांकि,कुल उत्पादन 120 लाख टन से कम नहीं आंका जा रहा है। 

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