इस वित्त वर्ष में रु.2.10 लाख करोड़ का विनिवेश लक्ष्य

इस वित्त वर्ष में रु.2.10 लाख करोड़ का विनिवेश लक्ष्य
मौजूदा हालत में सिर्फ रु.1.20 लाख करोड़ का विनिवेश होने की उम्मीद
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । कोरोना महामारी के चलते एक साथ राजस्व संग्रह के कई मोर्च़ों पर केद्र सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है।जिसके तहत एक तरफ आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार सुस्त रह जाने जीएसटी संग्रह काफी कम रह गया है।वहीं दूसरी तरफ घरेलू व वैश्विक मंदी ने मिलकर विनिवेशि की राह भी मुश्किल कर दी है।हालांकि केद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए की राशि विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य रखा था।जिसके तहत चालू वित्त वर्ष के पांच महीनों के अनुभव को देखकर केद्रीय वित्त मंत्रालय ने जो नया आकलन किया है जिसके हिसाब से इस वर्ष सिर्फ 1.20 लाख करोड़ रुपए की राशि ही विनिवेश से मिलती दिख रही है।यह राशि भी तभी मिलने की उम्मीद है जब अगले दो-तीन महीने में ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर तस्वीर कुछ स्पष्ट हो जाएं।
केद्रीय वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा जा रहा है कि पिछले दो सप्ताहों में बीपीसीएल,कॉनकोर और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में विनिवेश की प्रक्रिया को आगे बढाया गया है।इन तीनों कंपनियों के विनिवेश की प्रक्रिया दिसम्बर 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है जिससे 75-85 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है।वहीं विशेष समिति एचर इंडिया में विनिवेश को लेकर भी लगातार देसी-विदेशी निवेशकों के साथ बैठक कर रही है।जिसके तहत हाल ही में इसमें केद्र सरकार की हिस्सेदारी खरीदने की इच्छुक कंपनियों क लिए निविदा की तारीख दो महीने बढाई गई है।ऐसे में केद्र सरकार को भरोसा है कि एयर इंडिया से भी 25 से 30 हजार करोड़ रुपए का राजस्व जनवरी-फरवरी 2021 तक आ सकता है।हालांकि यह भी बहुत आसान नहीं नजर आ रहा है।चूंकि बीपीसीएल और एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर केद्र सरकार की सकारात्मक सोच के बावजूद जमीनी हकीकत दूसरी दिखाई दे रही है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूछ की कीमतों में भारी अस्थिरता और भारत सहित दुनिया के दूसरे देशों में गैर क्रूड ऑयल इनर्जी को बढावा देने से बीपीसीएल को लेकर निवेशकों का रुझान पहले से कम हुआ है।केद्र सरकार इसमें अपनी बड़ी हिस्सेदारी किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनी की बतौर रणनीतिक साझेदार बेचने की इच्छुक है।यही एयर इंडिया में चार वर्ष़ों से विनिवेश की कोशिश की जा रही है बहरहाल अभी तक सफलता नहीं मिली है।वहीं शिपिंग कॉरपोरेशन व कॉनकोर में ही विनिवेश फिलहाल संभव दिख रहा हे।केद्र सरकार के विनिवेश कार्यक्रम में भारतीय जीवन बीमार निगम (एलआइसी) का आइपीओ भी शामिल है।यह केद्र सरकार के साथ में है और हाल ही में इसके लिए सलाहकारों को नियुक्त किया गया है।ऐसे में कहा जा रहा है कि दूसरी कंपनियों में विनिवेश की सुस्त गति को देखते हुए एलआइसी में केद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक बेचने की संभावना पर विमर्श कर रही है।इसके लिए एलआइसी कानून में महत्वपूर्ण संशोधन करना होगा।

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