गार्म़ेंट निर्यात में सुधार

गार्म़ेंट निर्यात में सुधार
सितंबर में गिरावट 5 महीने में सबसे कम 
मुंबई । अप्रैल से तीव्र गिरावट दिखाई देने के बाद रेडीमेड गारमेंट का निर्यात सुधार के पथ पर है. अप्रैल में डॉलर में निर्यात में लगभग 91.04 प्रतिशत की गिरावट आई थी जबकि अगस्त में गिरावट 14% रही. अप्रैल में निर्यात घटकर 126 मिलियन डालर रहा जो अप्रैल 2019 में 1.409 बिलियन डालर था.  
अगस्त में निर्यात 1.084 बिलियन डालर हुआ, जो गत वर्ष की समान अवधि में 1.260 बिलियन डालर था. यूरोपियन यूनियन बाजारों के कारण यह सुधार दिखाई दिया. गारमेंट की मांग में सुधार दिखाई देने से क्षमता उपयोग बढ़कर 60-80 प्रतिशत पर पहुंच गया.  
कंपनियों ने कहा कि ग्राहक सीजन और विश्व भर में खोले गए स्टोर की संख्या के आधार पर नए आर्डर दे रहे हैं. ई कॉमर्स में भी सुधार दिखाई दे रहा है. उन्हें आगामी वर्ष की शुरुआत में ग्रोथ के वापसी करने की उम्मीद है. इंटरनेशनल ग्राहकों द्वारा उनके संबंधित देशों में लगे लॉकडाउन के कारण शिपमेंट को महीनों तक रोके जाने के बाद यह डेवलपमेंट हुआ है. लॉकडाउन की अवधि के दौरान आय का नुकसान हुआ है. लेकिन अब मई की तुलना में ऑर्डर प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दे रहा है. तिरूपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजा एन षणमुगम ने कहा कि पूछताछ का लेवल गत वर्ष से अधिक है.  
ब्रांड्स अब चीन का विकल्प तलाश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय निर्यातकों को कुछ प्रमुख चुनौतियों क्वालिटी, निरंतरता, मात्रा और समय पर डिलीवरी का समाधान करने की जरूरत है. यह घटक भारत से खरीदी करने के इच्छुक ग्राहक के लिए हमेशा बाधक रहे हैं. कीमत चुनौती किसी भी व्यापार का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि यदि हम इन घटकों का निराकरण कर सके तो वैश्विक व्यापार का अच्छा हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं. इससे हमें ब्रांडों  से अच्छा आर्डर भी प्राप्त होगा क्योंकि विश्व भर में शांत चाइना विरोधी माहौल है.  
मर्च़ेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम( एमईआईएस) के प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा कि इससे परिधान निर्यात प्रभावित नहीं होगा क्योंकि इसे गत वर्ष में वापस लिया गया था. इसके स्थान पर आरओएससीटीएल को पेश किया गया है.  अब सरकार आरओएससीटीएल के स्थान पर आरओडीटी ईपी पेश कर रही है. इससे हम एमईआईएस को आगे ना बढ़ाने के सरकार के निर्णय का कोई प्रभाव नहीं देख रहे हैं.  
देश के एक अन्य प्रमुख निर्यातक एसपी एपरल्स ने कहा कि सभी फैक्ट्रियां महापालिका द्वारा लागू किए गए सोशल डिस्टेंसिंग मानकों के कारण लगभग 60% क्षमता से काम कर रही हैं.  
कंपनी ने प्रवासी मजदूरों को हॉस्टल परिसर में रहने और खाने की सुविधा देकर लेबर की कमी की समस्या दूर की है. जो लोग चले गए थे, वह वापस आने लगे हैं.  कोविड-19 के प्रभाव के बारे में कंपनी ने कहा कि आर्डर प्रवाह के अलावा चौथी तिमाही में गत वर्ष की तुलना में रुपए में उल्लेखनीय अवमूल्यन हुआ है. सीएमएआई के चीफ मेंटर राहुल मेहता ने कहा कि गारमेंट निर्यात में सुधार दिखने लगा है. नई इंक्वायरी भी प्राप्त होने लगी है. यूरोपियन यूनियन और यूएस के खरीददारों ने निर्यातकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है. सप्लाई की क्षमता के बारे में बातचीत हो रही है.  

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