कृषि सुधार विधेयक का देशभर में स्वागत

कृषि सुधार विधेयक का देशभर में स्वागत
पंजाब- हरियाणा को छोड़कर 
हमारे प्रतिनिधि  
नई दिल्ली। लोकसभा में कृषि सुधार सम्बन्धी महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने के बाद पंजाब और हरियाणा को छोड़कर पूरे देश में चौतरफा स्वागत हो रहा है। जिससे किसानों के लिए 'एक देश, एक बाजार' का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसका लाभ व्यापारियों के साथ- साथ ग्राहकों को भी मिलेगा। अब व्यापारी अपना उत्पाद देश के किसी भी कोने में आसानी बेच सकेंगे, इस विधयेक से किसान, व्यापारी और कृषि क्षेत्र अधिक 'सशक्त' बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों को आश्वस्त किया कि लोकसभा में पारित कृषि सुधार संबंधी विधेयक उनके लिए `रक्षा कवच' का काम करेंगे और नए प्रावधान लागू होने के कारण वे अपनी फसल को देश के किसी भी बाजार में अपनी मनचाही कीमत पर बेच सकेंगे। 
यह विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोध से मुक्त करेगा। इस कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा। इससे हमारे कृषि क्षेत्र को जहां आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, वहीं अन्नदाता 'सशक्त' होंगे। कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधयेक एक इको-सिस्टम बनाएगा। किसान के पास फसल बेचने के वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होगी जिससे उनको अपनी उपज का लाभकारी मूल्य मिलेगा। यह किसानों की समृद्धि के लिये उनकी नियति बदलने की नींव रखेगा और भारत को कृषि में वैश्विक शक्ति बनने के रास्ते पर ले जायेगा। 
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने लोकसभा में कृषि क्षेत्र से संबंधित दो विधेयकों के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि ये किसानों को सशक्त बनायेंगे और कृषि के भविष्य पर इनका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा कि ये विधेयक किसानों की नियति को बदल देंगे।   
किसान हितरक्षक समिति के सागरभाई ने कहा, `महाराष्ट्र में, किसानों ने पिछले महीने एपीएमसी के बाहर अपनी उपज का 40 प्रतिशत बेचा, जिसका अर्थ है कि किसान को विपणन यार्ड के बाहर उच्च कीमत मिलती है।` वह इससे संतुष्ट भी हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता महेशभाई कासवाला कहते हैं, `यह बिल किसानों के पक्ष में है, क्योंकि यह किसानों को देश भर में अपने माल को अच्छी तरह से बेचने और उपज का अच्छा पैसा पाने का अधिकार देता है।` 
किसान अधिकार मंच के नेता भरत सिंह ज़ला ने कहा, `यह बिल किसान विरोधी है।` बिल में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकता है। इसलिए, यदि किसान लाभ कमाना चाहते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें अपनी उपज पर अधिक मूल्य मिले। अन्यथा, बिल का किसान के लिए कोई फायदा नहीं है।' 
महुवा मार्केट यार्ड के अध्यक्ष घनश्यामभाई पटेल ने कहा कि नए सुधारों से किसानों को ज्यादा फायदा नहीं होगा। किसान लूटपाट की स्थिति में हैं। क्योंकि खरीदार कीमत पर धोखा दे सकता है। इसके अलावा, नंबर दो का कारोबार बढ़ने का खतरा है।        

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