कम उपज, बेहतर निर्यात से कैस्टर के भाव में वृद्धि की संभावना

मुंबई। कैस्टर की अगली उपज कम आने के अनुमान एवं कैस्टर ऑयल की मांग बेहतर होने से जहां इसके दाम सितंबर में सात फीसदी बढ़े,वही अगले एक महीने में दस फीसदी बढ़ सकते हैं। हाजिर बाजार में कैस्टर का भाव 4100-4200 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है जो 1 सितंबर को 3900 रुपए था। कारोबारियों का कहना है कि एक महीने में 4500-4550 रुपए प्रति क्विंटल का स्तर छू सकता है।'
कारोबारियों का कहना है कि इस साल कैस्टर की बोआई का रकबा घटा है एवं इससे उत्पादन भी कम होगा। कैस्टर की बोआई घटने की वजह किसानों के अन्य बेहतर रिटर्न देने वाली फसलों की ओर मुड़ना है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2020-21 (जुलाई-जून) में कैस्टर की बोआई 7.92 लाख हैक्टेयर में हुई है जो पिछले साल की तुलना में 16 फीसदी कम है। बता दें कि कैस्टर उत्पादन में गुजरात पहले स्थान पर है जबकि राजस्थान,आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना का स्थान इसके बाद आता है।'
कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमान के मुताबिक देश में कैस्टर की उपज 17 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले साल की तुलना में 5.6 फीसदी कम होगा। जबकि,कारोबारियों के मुताबिक यह उत्पादन 15-16 लाख टन रहने का अनुमान है। कैस्टर के मुख्य उत्पादक इलाकों में हुई भारी बारिश से इसकी सप्लाई प्रभावित होगी जो इसके भावों के बढ़ने की मुख्य वजह रहेगी। कैस्टर की उपज को गुजरात के कच्छ एवं सौराष्ट्र इलाके में भारी बारिश से नुकसान हुआ है। एक मोटे अनुमान के तौर पर इन इलाकों में कैस्टर की 30 फीसदी फसल का नुकसान हुआ है। दूसरी ओर,लॉकडाउन में रियायत के बाद कैस्टर ऑयल की मांग में सुधार हुआ है।'
कैस्टर ऑयल निर्यातकों के मुताबिक चीन,थाईलैंड एवं जापान सहित अनेक देशों की ऑयल में मांग आ रही है। साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक जुलाई में देश में कैस्टर ऑयल का निर्यात 65682 टन पहुंच गया जो जुलाई 2019 के निर्यात 51962 टन की तुलना में 26.4 फीसदी अधिक है। यह जून 2020 के निर्यात 48589 टन की तुलना में 35.2 फीसदी ज्यादा है। हालांकि,अभी तक अगस्त एवं सितंबर के निर्यात आंकडे घोषित नहीं हुए हैं।'
इस बीच,जयंत एग्रो के चेयरमैन अभय उदेशी का कहना है कि वर्ष 2019 में कैस्टर ऑयल एवं डेरीवेटिव्ज का निर्यात 545292 टन रहा जो दस फीसदी कम है एवं निर्यात में यह कमी कोरोना माहमारी की वजह से घटा है। दूसरी ओर,कुछ कारोबारियों का कहना है कि कैस्टर का कैरीओवर स्टॉक ज्यादा होने से इसके दाम सीमित दायरे में ही बढ़ पाएंगे। कैस्टर का कैरी ओवर स्टॉक चार लाख टन आंका जा रहा है जो पिछले साल 3.50 लाख टन था। नई फसल की आवक दिसंबर से होगी लेकिन इसकी आवक में बढ़ोतरी जनवरी से होगी जो इसके भावों पर दबाव बनाएगी।

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