रेडीमेड गार्म़ेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री बढ़ने की उम्मीद

केंद्रीय कर्मचारियों को दिवाली की सौगात
व्यापार टीम'
मुंबई । कोरोना के कारण 6 महीने तक चले लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है और उसकी गाड़ी फिर से पटरी पर चढ़ाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण द्वारा घोषित किए गए सशर्त पैकेज से बाजार में कहीं खुशी तो कहीं निराशा का माहौल है. 12% जीएसटी बिल वाली खरीदी के सामने केंद्रीय कर्मचारियों को एडवांस मंजूर होगा, ऐसी शर्त होने से 12% से कम जीएसटी वाले सोना- चांदी की ज्वेलरी और टेक्सटाइल की बिक्री बढ़ने के सामने प्रश्न चिन्ह है. हालांकि गारमेंट, फुटवेयर और इलेक्ट्रॉनिक की वस्तुओं की बिक्री बढ़ेगी, ऐसी उम्मीद व्यापारी आलम ने व्यक्त की है.''
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण द्वारा की गई घोषणा के बारे में अहमदाबाद मस्क़ती मार्केट महाजन के प्रमुख गौरांग भगत ने कहा कि मूल तो बाजार में किसी भी स्वरूप में वित्त लाना सरकार का आशय है. दिवाली में खरीद शक्ति बढ़ाने के लिए यह प्रोत्साहन दिया गया है. आखिर में तो सरकार के पास 5 से 18% रकम वापस आने वाली है.''
पांचकुवा क्लॉथ मार्केट के प्रमुख किरीट पटेल ने कहा कि इस निर्णय से कपड़े की भी ग्राहकी निकलने की आशा रखी जा सकती है क्योंकि रुपया बाजार में आने पर खर्च तो होगा ही.' बाजार में रकम के फिरने पर कुछ प्रवाह गारमेंट की ओर भी आएगा. दूसरा कारण त्यौहार आने से और रकम आ जाने से ग्राहकी निकलने की संभावना है.''
वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों को एलटीसी वाउचर स्कीम और रु.10000का फेस्टिवल एडवांस की घोषणा करने से देशभर के छोटे व्यापारियों के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, ऐसा चार्टर्ड एकाउंटेंट रूपिन पच्चीगर का कहना है. गारमेंट, फुटवेयर और इलेक्ट्रॉनिक के व्यापार में तेजी के संकेत है. लंबे समय बाद वित्त मंत्री के उत्साहजनक कदम से लोगों में उत्साह का नया संचार दिखाई देगा.''
कैट के गुजरात चैप्टर के प्रमुख प्रमोद भगत ने कहा कि वित्त मंत्री ने सरकारी कर्मचारियों को खुश किया है साथ ही छोटे व्यापारियों के व्यापार बढ़ाने का द्वार खोला है. इससे दिवाली में बिक्री सुधारने की गुंजाइश दिखाई दे रही है. वित्त मंत्री की घोषणा के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ रेडीमेड गारमेंट के क्षेत्र में तेजी दिखाई देगी. इस घोषणा के बाद फेस्टिवल सीजन में खरीददार वर्ग उत्साह के साथ खरीदी करने आएगा.'''''''''''''''
ज्वेलरी की बिक्री के बारे में शंका'
इब्जा (इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन) के सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता और बुलियन एनालिस्ट भार्गव वैध का कहना है कि भारत सरकार के रु.73000 करोड़ के राहत पैकेज से भारतीय अर्थव्यवस्था में अल्पकाल में गतिशीलता आएगी. इसका सीधा लाभ 3% जीएसटी वाले बुलियन और ज्वेलरी बाजार को नहीं मिलेगा. हालांकि लोगों के हाथ में त्योहारों से पूर्व खरीद शक्ति आने से अन्य रोजगारों में आई यह रकम देर- सबेर बुलियन ज्वेलरी बाजार में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.''
भार्गव वैद्य का स्पष्ट रुप से मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को आंशिक लाभ जरूर होगा. यदि राज्य सरकारें भी ऐसा कदम उठाए तो बाजार में फैली हुई निराशा आशावाद में परिवर्तित होगी. मात्र 93 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सीमित लाभ होने से दीर्घकालीन खरीद शक्ति का उद्देश्य पूरा होना मुश्किल है. भारत को जरूरत है दीर्घकालीन आर्थिक गतिशीलता की.''
सुरेंद्र मेहता का कहना है कि वित्त मंत्री की बात माने तो 32000 करोड़ रुपए सीधा ही मार्केट में आएगा. 130 करोड़ की जनसंख्या में से एक करोड़ से कम सरकारी कर्मचारियों को उसका लाभ मिलना है. सोना का भाव रु.50000 प्रति 10 ग्राम होने से इस योजना में से हमारे हिस्से में क्या आएगा ? ऐसा प्रश्न उन्होंने किया था.''
अन्य एक डीलर ने कहा कि सरकार ने नए राहत पैकेज में बहुत सी बाधाएं रखी है. 12% जीएसटी वाले माल सामान की खरीदी का बिल पहले पेश करना है उसके सामने उनको नकद सहायता मिलनी है. अब यदि कोई व्यापारी जीएसटी रजिस्ट्रेशन में ना हो और उसके पास से खरीदी हुई होगी तो कर्मचारी को लाभ नहीं मिलेगा. निर्मला सीतारामण के अनुमान के अनुसार यदि रु.32000 करोड़ खर्च हो जाए तो उसमें से सरकार को जीएसटी के रूप में रु.3000 करोड़ वापस मिलना है, जो सरकारी आय है.

© 2020 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer