भारत का गेहूं निर्यात बढ़ने की उम्मीद, लेकिन रिटर्न बढ़िया नहीं

भारत का गेहूं निर्यात बढ़ने की उम्मीद, लेकिन रिटर्न बढ़िया नहीं
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में दाम नीचे होने एवं अमरीकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए के कमजोर होने से भारत का गेहूं निर्यात तेजी से बढ़ने की संभावना है। लेकिन भारतीय निर्यातकों को इस निर्यात में बड़ी कमाई होने के आसार नहीं हैं। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्टस एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के मुताबिक देश से अप्रैल-अगस्त के दौरान गेहूं निर्यात 105 फीसदी बढ़कर 217544 टन पहुंच गया। 
कारोबारियों का कहना है कि भारतीय गेहूं का निर्यात मौजूदा समय में 250-260 डॉलर प्रति टन एफओबी पर हो रहा है जबकि यह पिछले साल 300-310 डॉलर था। गेहूं का निर्यात कोरोना की वजह से आई खाद्यान्न तंगी से बढ़ा है। कई देश गेहूं का निर्यात कर रहे हैं लेकिन भारतीय निर्यात सस्ता होने से प्रतिस्पर्धा कर रहा है एवं और मात्रा में बिकवाली हो सकती है। कारोबारियों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में भारतीय गेहूं बांग्लादेश, श्रीलंका और अन्य दक्षिण एवं दक्षिणपूर्व एशियाई देशों को 210-215 डॉलर प्रति टन पर निर्यात होगा। घरेलू बाजार में हाजिर गेहूं 1700-1750 रुपए प्रति क्विंटल बोला जा रहा है जो पिछले साल समान समय में 2200-2300 रुपए प्रति क्विंटल था। 
कारोबारियों का कहना है कि मार्च में गेहूं की नई फसल आने से पहले हाजिर बाजारों में गेहू के दाम टूट रहे हैं। यह गिरावट गेहूं की बम्पर पैदावार की वजह से है। वर्ष 2019-20 फसल वर्ष में भारत में 10.76 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ जो पूर्व वर्ष की तुलना में तकरीबन चार फीसदी ज्यादा है। मार्च अंत में कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन से गेहूं की थोक एवं ब्लक मांग बुरी तरह प्रभावित हुई। हालांकि, अमरीकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए के कमजोर होने से निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं बेचने का मौका मिल गया। वर्तमान में रुपया 74.38 के करीब चल रहा है जो पिछले साल समान समय में 71.45 था।

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