पति-पत्नी को आय, मिल्कियत और Iण की एफिडेविट करने का आदेश

पति-पत्नी को आय, मिल्कियत और Iण की एफिडेविट करने का आदेश
प्रतिफल के केस में सुप्रीम कोर्ट का अभूतपूर्व फैसला
विशेष संवाददाता
मुंबई। देश के सभी अदालतों में चल रहे और आगे भी दर्ज होने वाले तलाक के गुजारा (मेन्टेनन्स) खर्च से संबंधित केस को असर करने वाले एक अभूतपूर्व फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे केस के दोनों पक्षकारों- पति और पत्नी को उनकी मिल्कित और Iण से संबंधित सभी जानकारी की एफिडेविट दर्ज कराने का आदेश दिया है। 
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला फेमिली कोर्ट, डिस्ट्रिक कोर्ट और मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहे मेन्टेनन्स केस पर लागू होगा। हालांकि, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, गरीबी रेखा से नीचे वर्ग के लोगों और दैनिक काम करने वाले श्रमिकों को यह एफिडेविट दर्ज नहीं करनी होगी। 
न्यायमूर्ति इन्दू मल्होत्रा और आर. सुभाष रेड्डी द्वारा दिए गए इस फैसले (व्यापार के पास इसकी प्रति है) में गुजारा खर्च से संबंधित आवेदन और उन्हें दिए गए जवाब में दोनों पक्षकारों को जवाबदारीपूर्वक व्यवहार करने के लिए कहा गया है। अदालत ने दोनों पक्षकारों को चेतावनी दी है कि एफिडेविट में गलत और अनुचित जानकारी, महत्वपूर्ण जानकारी छुपाने के गुनाह के खिलाफ क्रिमिनल प्रोसिजर कोड के सेक्शन 340 के तहत अदालती अवमानना की कार्यवाही हो सकती है।
न्यायमूर्ति ने अपने फैसले में मिल्कियत और Iण के मॉडेल एफिडेविट पेश करने को कहा है। इस एफिडेविट में पक्षकारों को अपनी आय, आय के स्रोत की (नौकरी, व्यवसाय, धंधा आदि), स्थायी, अस्थायी मिल्कियत, Iण और वित्तीय जवाबदारी, संतानों की, खुद की और परिवार में उन पर आश्रित हों, ऐसे सदस्यों की चिकित्सकीय विवरण देना होगा।
नेहा नामक एक महिला ने 2013 के जनवरी में अपने पुत्र के जन्म के बाद पति रजनीश का घर छोड़ा था। मुंबई के फेमिली कोर्ट में उसने पति से अंतरिम प्रतिफल की मांग की थी। जो अदालत ने मंजूर किया। पति ने इस फैसले के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में आवेदन किया तो कोर्ट ने नामंजूर किया फिर उसने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने फैसले में कहा कि इस समय अदालतें अंतरिम प्रतिफल की मांग करने वाले आवेदन का फैसला आय और सम्पत्ति की अधूरी जानकारी के आधार पर देती हø। ऐसे आवेदनों में दोनों पक्ष अपनी आय और मिल्कियत की सही जानकारी छिपाती हø। इसलिए फेमिली कोर्ट को उचित निर्णय लेना कठिन होता है। प्रतिफल की मांग वाले आवेदनों में पत्नी पक्ष अपनी आवश्यकता बढ़ाकर बताती है और पति की तरफ से सही आय छुपाई जाती है। इन संयोगों में एक न्यायसंगत पद्धति निश्चित करना अनिवार्य है, ऐसा अदालत ने कहा।
अदालत ने एफिडेविट दर्ज कराने के लिए दिशानिर्देश स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों पक्षों को प्रतिफल आ आवेदन करने के चार सप्ताह में अपनी मिल्कियत और Iण का विवरण एफिडेविट में करना होगा। अदालत पक्षकार को और समय के लिए दो बार अवसर देगा। इस समयावधि में पक्षकार की तरफ से एफिडेविट नहीं की गई तो अदालत जिसकी तरफ से एफिडेविट आई होगी उसके विवरण के आधार पर फैसला सुना देगा।

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