कपड़ों को अब नहीं होगी रंगने की जरूरत

कपास के आणिविक जेनेटिक कलर कोड ढूंढने का दावा
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । अब कपड़ों को रसायनों से रंगने की जरुरत नहीं पड़ेगी।जिसको लेकर ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने रंगीन कपास को विकसित करने में सफलता पाने का दावा किया है।जिसके तहत इस शोध से अब कपड़ों में रसायनिक रंगों के इस्तेमाल की जरुरत नहीं पड़ेगी।
दरअसल कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजस्ना की तरफ से कहा गया है कि हमने कपास के आणविक रंग के जेनेटिक कोड को पाने में सफलता हासिल कर ली है।ऐसे में हमने इस समय अलग अलग रंगों के पौधों के टिश्यू को तैयार कर लिया है।अब इसे खेतों में उगाया जा सकता है।ऐसे में अब हम प्राकृतिक कपास की किस्म तैयार कर रहे हø जिसके धागों से बने कपड़ों में सिलवट नहीं पड़ेगी और उसे खींचना भी आसान होगा।इससे सिंथेटिक कपड़ों का उपयोग कम करने में आसानी होगी।हालांकि वैज्ञानिकों की तरफ से आगे कहा गया है कि इस समय दुनिया भर में 60 प्रतिशत से अधिक पोलिएस्टर कपड़ों का निर्माण हो रहा है जो कि 200 सालों तक नष्ठ नहीं होते हø।इसके साथ ही एक किलो कपड़ों को रंगने के लिए एक हजार लीटर पानी बर्बाद होता है।ऐसे में अब इस कपास से बने धागे को रसायनिक रंगों से रंगने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

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