कच्चे पामतेल आयात पर सीमा शुल्क घटा

उपभोक्ताओं को बढ़ती महंगाई से मिलेगी राहत
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । पिछले काफी अर्से से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की मांग बढ रखी थी।वहीं विश्व बाजार में खाद्य तेलों की उपज में कमी का अनुमान है।जिसके चलते घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी का बोलबाला बना रहा है।जिससे आम जनमानस खाद्य तेलों की महंगाई से सीधे तौर पर हलकान हो रहे हø।बहरहाल केद्र सरकार की तरफ से खाद्य तेलों की तेजी पर अंकुश लगाने को लेकर क्रूड पॉम आयात (सीपीओ) पर सीमा शुल्क 10 प्रतिशत घटा दिया है।जिससे अब खाद्य तेलों की बढती तेजी महंगाई पर विराम लगेगी।जिससे एक तरफ आम उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों की महंगाई से राहत मिलेगी।
दरअसल देश में खाद्य तेलों की घरेलू खपत की पूर्ति को लेकर 65 प्रतिशत से अधिक आयात से पूरा किया जाता है। बहरहाल पिछले काफी अर्से से कच्चे पाम ऑयल पर आयात शुल्क अधिक होने के चलते आयात प्रभावित हो रहा था।ऐसे में केद्र सरकार की तरफ से केद्र सरकार ने 26 नवम्बर 2020 को क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) पर बेसिम सीमा शुल्क 10 प्रतिशत घटाकर 27.50 प्रतिशत कर दिया है।यह नया शुल्क 27 नवम्बर 200 से प्रभावी हो गया है।इस कदम से कच्चे पाम ऑयल का आयात सुधरेगा।जिससे घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढेगी।जिससे सही मायने में घरेलू बाजार में खाद्य तेल के दाम में भी नरमी आएगी।जिससे स्वभाविक हे कि आम उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों की बढती महंगाई से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।वैसे भी भारत के कुल खाद्य तेल की खपत में पाम तेल का हिस्सा 40 प्रतिशत से अधिक है।वहीं कच्चा पेट्रोलियम तेल और साने के बाद पाम तेल भारत का तीसरा सबसे बड़ा आयात किया जाने वाला जिंस है।भारत खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है।इस समय मलेशिया और इंडोनेशिया सहित अन्य देशों से वार्षिक लगभग 1.5 करोड़ टन खाद्य तेल का आयात हो रहा है।इससे पहले जनवरी में आसियान देशों से आयात के लिए केद्र सरकार ने कच्चे पामतेल पर सीमा शुल्क 40 से घटाकर 37.7 प्रतिशत कर दिया था।वहीं चालू रबी मौसम के तहत सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपीत्र् पिछले वर्ष के 4425 रुपए से बढाकर 4625 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है।जिससे किसानों को सरसों की खेती करने में रुचि बढ रखी है और चालू रबी फसल मौसम में सरसों की बोआई काफी जोरशोर से हो रही है।

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