खाद्यतेल में आग झरती तेजी

खाद्यतेल में आग झरती तेजी
दस माह के अंतराल में भाव 25 प्रतिशत तक बढ़े
हमारे संवाददाता   
तिलहनो और सोया तेल के साथ साथ अन्य तेल में भी आग झरती तेजी बनी है  । म.प्र. में  लगभग  20-25  हजार बोरी सोयाबीन की  औसत दैनिक आवकों  के बीच  इंदौर   सोया  के साथ ही अन्य तेल  तेजी की राह पर चल पडे  है । वर्तमान मौसम में अनुकूल परिस्थितियो से रबि की फसल बेहतर आने की पूरी संभावना बताई जा रही है । इनमें सरसो -रायडा की भारी पैदावार की संभावना बताई जा रही है । गत् वर्ष से पूरे समय से सरसो पर भारी भाव 4800-5000 रू उपजने से इस वर्ष सरसो की अच्छी बोउनी हुई बताते है  । वर्तमान में सरसों का भाव 5500 रू से उपर है ।  जनवरी 2020 में ही सोया तेल 890 रू और पाम तेल 860 रू के भाव पर था ।  गत् हप्ते गुरूवार तक सोयातेल भाव 1060 रू और पाम तेल का ही इतना ही भाव था । अर्थात आलोच्य वर्ष की अल्प अवधि में ही खाद्य तेलो पर कोई 25 प्रतिशत की तेजी हो गई । जनता के ही बाजार विश्लेषकों की सुने तो कोरोना वायरस की महामारी से उपजे डर ने देशभर में मार्च से लॉकडाउन लगा रखा था ।लॉकडाउन के के कारण बाजार से सौदा न उठने की प्रक्रिया पर मंदी आ गई । मगर कुछ अल्प समय रहकर बाजार व्यवसाईयो ने स्टॉक नही है कि  राग अलापकर खाद्य सामग्रियो का टोटा बताकर महंगाई बढाना शुरू कर दिया । उनके अनुसार व्यापार जगत  ने महंगाई का सिंडिकेट कारटेल बनाकर सटटे् में और उत्पादनो में आपूर्ति में कमी बताकर बाजार  को उंचे महंगाई के दर्पण में खडा कर दिया है , जबकि उत्पादक क्षैत्रो में लॉकडाउन अवधि मे स्टॉक नही निकल सका उसी पर तेजी बनाते हुऐ भारी मुनाफा प्रक्रिया अपना ली । आग झरती इस तेजी तत्रमें सोया-पाम तेल और अन्य खाद्य तेल सर्वकाली उंचे भाव पर हो गये है । कृषि उम्पादनो और  तिलहनो के स्टॉक में कमी नही बताई जास रही है । उधर कृषक जगत को मिल रही भारी सुविधाओ में  आगे भाव बढे इससे स्टॉक करने की भारी प्रवृत्ति जाग गई होने से माल रोकने से स्टॉक अब तिलहनो के वर्तमान उंचे भाव पर निकल कर आ रहा बताया जा रहा है । गत् हप्ते मलेशिया बुर्सा इंडेक्स मंदी में रहा । शुक्रवार को सुबह  तेजी में खुला और यह 1618 पाइंट उपर तक जाने के बाद पुन: नीचे बना रहा । शिकागा थसोया तेल भी अधिक तेजी में गत् हप्ते नही था । बावजूद भारत के सटट्कारो ने सोया और पाम तेल पर भारी तेजी कर डाली , जिसे बाजार उपभोक्ता ने स्टॉकपर लाभ कमाई का होना बताया है । मध्मवर्गी और गरीब जनता पर महंगाई का भारी बोझा बढता जा रहा है । कुछ जनता को तो कोरोना लॉकडाउन पर आय का स्त्रोत भी खत्म हो गया है । सराकार को ऐसे जनमानस हेतु कुछ करना चाहिये जिन्हे कोरोना लॉकडाउन का खमियाजा अपनी नोकरी का भुगतना पडा है ।    खाद्य तेलो पर हाजिर बाजार में चल रही सटट्बाजी पर कोई रोक नही है । भारी उंचे भाव पर उपभेक्ता ग्राहकी के साथ ही व्यापरिक मांग भी  दबाव वाली नही है । खाद्य तेलो की कई श्रेणियां है और सभी में आपूर्ति की अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद कौन है देश में जो तेजी को हवा दे रहे है क्या  हाजिर बाजार में सटटे् के वायदा व्यापार का भारी प्रभाव होने से उनकी सिंडीकेट  वायदा बाजार से कदमताल  कर  रही है ? इस वर्ष  सभी प्रकार के भारी  तिलहन उत्पादनो  और भर सीजन में उपभोक्ताओं को  उंचे भाव 125 रू के आसपास का तेल नसीब हो रहा है ।  उपभोक्ताओं  के अनुसार महंगा होते तेल के कारण घरों में भारी तरी खाना लोगो ने कम कर दिया है उनकी वार्षिक खपत  दो  डिब्बे से  डेढ  डिब्बा  हो गई है । इस तरह घरो में खपत कम होने से सकल स्टॉक में  कमी नही आ सकती है । वायदा व्यापार की हवा से हाजिर व्यापार का खेल अधिक संपन्न होता जा रहा है । कभी वायदा व्यापार तेज तो कभी हाजिर व्यापार तेज हो जाता है । वर्तमान परिस्थिति यह है भारी मिलावट के कारण पेट की एवं अन्य बीमारीया भी बढती जा रही है ।   
व्यापारिक क्षैत्रो के अनुसार विगत् दो सप्ताह  मे खाद्य तेलो पर जिस कदर तेजी हुई है उससे साफ झलकता है कि सटट्बाजी के व्यापार ने खाद्य तेलो पर जबरन के भाव  बढने की स्थितियां पैदा की है । विदेशी हवाऐं ही व्यापार पर गहरा असर डाल देती है । विगत् हप्ते तक वैश्विक वायदा व्यापार में सोया तेल वायदा मंदी के वातावरण में था और  गुरूवार   को भी मलेशियन  केएलसीई  रिंगिट कम और शिकागो सोया तेल वायदा  भी नरम मे  चल रहा  था ।

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