एनबीएफसी को बैंक के तौर पर कार्य करने की अनुमति देने की सिफारिश

एनबीएफसी को बैंक के तौर पर कार्य करने की अनुमति देने की सिफारिश
अग्रणी कार्पोरेट घरानों द्वारा संचालित 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली > देश के अग्रणी कारपोरेट घरानों के बøकिंग सेक्टर में उतरने का रास्ता साफ हो सकता है।जिसको लेकर रिजर्व बøक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की एक समिति ने देश के अग्रणी कारपोरेट घरानों द्वारा संचालित होने वाले गैर बøकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) को एक संपूर्ण बøक के तौर पर काम करने की इजाजत देने की सिफारिश की है।वहीं एनबीएफसी बैंकों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी की मौजूदा सीमा 15 प्रतिशत से बढाकर 28 प्रतिशत करने की भी सिफारिश की गई है।ऐसे में इन सिफारिशों को अमलीजामा पहनाने को लेकर केद्र सरकार को कई स्तर पर विचार विमर्श करना होगा और बøकिंग अधिनियम में भारी संशोधन करने होंगे। बहरहाल इन्हें अमल में लाने के बाद देश के बøकिंग सेक्टर में व्यापक बदलाव हो जाएगा।
दरअसल रिजर्व बøक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की तरफ से जून 2020 में इक्विंटी होल्डिंग के पेटर्न में बदलाव पर सुझाव देने को लेकर आंतरिक कार्यदल का गठन किया थाजिसकी रिपोर्ट 20 नवम्बर को 2020 को सार्वजनिक की गई।ऐसे में इस कार्यदल का पहला सुझाव यही है कि 15 वर्ष़ों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत हो।वहीं दुसरा सुझाव यह है कि गैर प्रवर्तक हिस्सेदारी के लिए शेयर होल्डिंग की सीमा 15 प्रतिशत हो।वहीं तीसरा सुझाव यह है कि अग्रणी कारपोरेट घरानों या औद्योगिक कंपनियों को बøकिंग कानून 1949 में संशोधन के जरिए प्रवर्तक बनने की इजाजत दी जाए।बड़ी कंपनियें की तरफ से चलाए जा रहे 50 करोड़ रुपए से अधिक आकार के एनएफबीसी को दस वर्ष़ों के संचालन के बाद बøक में तब्दील करने की सिफारिश भी की है।इसका मतलब यह हुआ कि बजाज फाइनेंस,एलएंडटी फाइनेंस जैसे एनएफबीसी अब बøक में तब्दील हो सकेंगे।वहीं पेमेंट बøकों को तीन वर्ष के अनुभव पर स्माल फाइनेंस बøक व पेमेंट बøक को छह वर्षों के अनुभव पर यूनिवर्सल बøक में तब्दील करने की भी सिफारिश की गई है।वहीं बøकिंग लाइसेंस के लिए पूंजी आधार की सीमा 500 करोड़ रुपए से बढाकर 1,000 करोड़ रुपए करने की सिफारिश की गई है।ऐसे तमाम सुझावों में सबसे अहम कारपोरेट घरानों को बøकिंग कंपनियों का प्रवर्तक बनने और प्रवर्तकों की हिस्सेदारी बढाकर 26 प्रतिशत करने की है।जिसके लिए केद्र सरकार को कई तरह के नियम बदलने होंगें।जिसके तहत बøकिंग अधिनियम की धारा 20 के तहत बैकिंग कंपनियों में किसी निदेशक से जुड़े किसी दुसरी कंपनी को ऋण वगैरह नहीं दिया जाता है।इस संबंध में कनेक्टेड लøडिंग का नियम लागू होता है।ऐसे में इस नियम में बदलाव करने होंगे।ऐसे में यह सुझाव एक तरह से देश के भावी बøकिंग व्यवस्था का एक रोडमैप है।

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