केद्रीय कृषि मंत्री गुरुवार को करेंगे किसानों से बातचीत

केद्रीय कृषि मंत्री गुरुवार को करेंगे किसानों से बातचीत
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । कृषि कानून के विरोध में पंजाब-हरियाणा,उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के किसानों ने 26-27 नवम्बर 2020 को दिल्ली कूच करने का आहृवान किया था।बहरहाल दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी थी।जिसके बावजूद पंजाब,हरियाणा व राजस्थान सहित कई राज्यों के हजारों किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच करने पर उतारु थे।बहरहाल दिल्ली पुलिस की सख्त पहरा के चलते किसानों ने दिल्ली कूच करने में कामयाब नहीं हो पाए और वह हरियाणा बॉर्डर पानीपत टोल के पास एकत्रित होकर आंदोलित थे।ऐसे में एक तरफ केद्र सरकार नए कृषि कानूनों को किसानें की आय दोगुनी और खेतीवाड़ी में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला बता रही है।वहीं दूसरी तरफ कृषि विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं है।
दरअसल भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसानों को सड़क पर उतरने का ऐलान किया है।ऐसे में उत्तर भारत के किसान लामबंद होकर कृषि कानून के विरोध में आंदोलित रहे हø।जिसको लेकर कृषि कानून के विरोध में आगे भी सड़कों पर आंदोलन को अंजाम दिया जाता रहेगा और तब तक किसान नहीं रुकेगा जब तक कृषि कानून में संशोधन नहीं होगा।वहीं भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रदेश के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसी भी सूरत में देश का अन्नदाता रुकेगा नहीं। हमारे साथ चार बैरिकेटिंग तोड़कर यहां तक आ पहुंचे हø।अब दिल्ली दूर नहीं है।कोई ताकत नहीं रोक सकती है।जिसको लेकर एक तरफ केद्रीय कृषि मंत्री नरेद्र सिंह तोमर ने 26 नवम्बर 2020 को कहा कि कृषि कानून क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है।जिसको लेकर किसानों से प्रदर्शन नहीं करने की अपील की और 3 दिसम्बर 2020 को बातचीत करने के लिए किसानों को आमंत्रित किया है।वहीं केद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 नवम्बर 2020 को कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसानों से बातचीत की अपील करते हुए कहा कि वह कहीं भी उनसे बात करने को तैयार है।उन्होंने कहा कि वह रक्षा मंत्री हø।वहीं कृषि मंत्री भी रह चुके हø।इससे भी बढकर वह किसान के बेटे हø।इस नाते वह किसानों को बातचीत करने के आमंत्रित करते हø।
कृषि मंत्री ने कहा कि इन कृषि कानूनों से किसानों की आय में इजाफा होगा।उन्होंने कहा कि वह बड़े किसानों की बात नहीं कर रहें हø बल्कि छोटे किसानों की बात कर रहे हø।उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों पर अगले तीन चार वर्ष़ों में इसके नतीजे दिखने लगेंगे।वहीं दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष वी के सिंह ने कहा कि नए कृषि कानून से किसान बर्बाद हो जाएगा और कॉरपोरेट जगत का ािzती पर कब्जा हो जाएगा।उन्होंने कहा कि किसानों को मंडियों के अतिरिक्त खुला बाजार उपलब्ध कराने वाले कानून में कहीं भी न्यूनतम समर्थन मूल्य का लागू करने का जिक्र तक नहीं है।ऐसे में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) में कॉरपोरेट उद्योगपति घुसपैठ करेंगे और कृषि उत्पाद मनमाने दाम पर खरीदेंगे।ऐसे में किसान का ठपzिंा लगने से इन पर धारा 3/7 यानी जमाखोरी के तहत मुकदमा दर्ज नहीं हो सकेगा।वहीं वन नेशन-वन मार्केट का फॉर्मूला 68 वर्ष से चल रहा है बहरहाल गन्ना किसानों को भुगतान के लिए चक्कर काटने पड़ते हø।ठेका खेती में कंपनी-कॉरपोरेट द्वारा गड़बड़ी करने पर किसान अदालत की शरण में नहीं जा सकता है।ऐसे में विवाद सुलझाने के लिए किसान को एसडीएम-डीम के दरबार में हजारी लगानी होगी।वहीं केद्र सरकार के इशारे पर चलने वाली नौकरशाही से उसे क्या न्या मिल पाएगा? गुणवत्ताहीन फसल बताकर किसानों के उत्पाद को आधी कीमत पर खरीदा जाएगा।वहीं भारतीय कृषि समाज के अध्यक्ष कृष्ण चौधरी ने कहा कि नया कृषि कानून किसानों को अपने उत्पाद-उपज बेचने के लिए खुले बाजार में खड़ा करता है।ऐसे में प्रतिस्पर्धा होने पर उपज-उत्पाद का अािधिक दाम मिलेगा।जिसे मंडियों में इसका दशकों से शोषण होता आ रहा है।जिसके पास उपज बेचने के लिए विकल्प होगा बहरहाल बिचौलियों को सरकार का यह फैसला रास नीं आ रहा है।पंजाब में 98 प्रतिशत गेहूं-धान की खरीद एमएसपी पर हुई है लेकिन किसान विरोध क्यों हो रहा है।किसानों का यह विरोध बिचौलियों द्वारा प्रायोजित है।उन्होंने आगे कहा कि 86 प्रतिशत लघु किसानों की सुरक्षा के लिए नए कानून में यूरोप की तर्ज पर रिजर्व प्राइस की व्यवस्था सुनिश्चित की शिए यानी सरकार द्वारा तय भाव से नीचे बाजार में किसानों के उत्पाद-उपज की खरीद नहीं होगी।ऐसा करने पर कंपनी पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।वहीं ठेका खेती की तरफ से किसान फायदा किलने पर अपनी मर्जी से जाएगा।जिसे उपज फसल की बुआई-जुताई के लिए अग्रिम भुगतान मिलेगा।फसल की दरें पहले से तय हो सकेंगी।इसके लिए किसान को समझदारी दिखानी होगी तभी ठेका खेती का फायदा मिलेगा।उन्होंने सुझाव दिया कि किसान उत्पादक संगठन बनाकर अधिक फायदा हासिल कर सकेंगे।

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