रु 3 हजार करोड़ की लागत वाली कोच्चि-मंगलुरू गैस पाइपलाइन का उद्घाटन

पीएम ने प्रस्तुत किया एनर्जी रोडमैप
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने 5 जनवरी 2021 को देश की भावी एनर्जी खपत का रोडमैप प्रस्तुत किया।जिसके तहत देश की अर्थव्यवस्था में गैस की हिस्सेदारी मौजूदा छह प्रतिशत से बढाकर अगले पांच वर्ष में दोगुनी की जाएगी और पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों पर निर्भरता को कम करते हुए सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी बढाई जाएगी।यह कदम आयातित कच्चे तेल पर देश की निर्भरता को कम करेंगे जिसका रणनीति फायदा होगा।
पीएम मोदी तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कोच्चि-मंगलुरु गैस परियोजना का उद्घाटन 5 जनवरी 2021 को करे हुए कहा कि केरल के कोच्चि से कर्नाटक के मंगलुरु तक की 450 किलोमीटर की यह परियोजना दोनों राज्यों के लगभग एक दर्जन जिलों में आर्थिक गतिविधियें को बढावा देगी।वर्चुअल प्लेटफार्म के जरिए इस उद्धाटन कार्यक्रम में केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन,कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने भी हिस्सा लिया।इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्तरा में आने के बाद से ही जिस तरह से हाईवे,रेलवे,मेट्रो,गैस कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं को बढावा देना शुरु किया गया है जिसका असर आर्थिक विकास पर शीघ्र ही दिखाई देगा।हमारी सरकार एनर्जी प्लानिंग भी इस तरह से कर रही है कि देश की बड़ी आबादी को स्वच्छ इúधन किफायती कीमत पर मिल सके।गैस पाइपलाइन से जुड़ी परियोजनाएं तेजी से पूरी की जा रही है ताकि अगले पांच से छह वर्ष़ों में 32 हजार किलामीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा सके।पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकारी पूरे देश को एक पाइपलाइन ग्रिड से जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है।इससे स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच बढेगी और सिटी गैस परियोजनाओं को विकसित करने में भी मदद मिलेगी।यह पाइपलाइन परियोजना भी एक देश एक ग्रिड की दिशा में अहम कदम है।हाइब्रिड पावर परियोजनाओं को भी बढायवा दिया जा रहा है जैसे गुजरात में एक ही जगह पर पवन और सौर बिजली परियोजनाएं लगाई जा रही है जो कि विश्व की सबसे बड़ी परियोजना होगी।पीएम मोदी ने इस दौरान सीएनजी स्टेशन लगाने,उज्जवला के तहत एलपीजी कनेक्शन देने से लेकर सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।इस उद्घाटन के मौके के बाद केद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने ट्वीट किया कि सहकारी संघवाद यानी कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का इससे बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता है।उन्होंने दोनो राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं संबंधित लोगों को इस परियोजना में योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

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